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That my age is over, my family background is not that good but somewhere there is a common desire in everyone's mind how to become successful in life. However, the success criteria of people vary.
Some people want money, some fame, some want to live a good family life and some wish it well. Some people become successful in this and some do not.
You can grow your brain and get smarter. It’s just a matter of how. This simple practice makes you smart and Intelligent. Training your brain, muscles, the body will also help you learn faster and you Become More Intelligent and Smart.
At one time or another, it's the dream of nearly every person to become famous and enjoy the adulation of millions of adoring fans. If it is your desire to be famous, this article presents a few tips to help point you in the right direction. With a lot of luck and even more hard work, perhaps we will see your face on television, on stage, or in the movies someday.
Another way that you can work to become famous is by breaking into show business. If you feel you have acting, dancing or singing skills, why not go out and do some auditions? Auditioning will help you see where your talents lie, and sharpen your focus on the skills you need to work on. You'll be able to see other people in the business and learn from them if you keep your mind open.
परिचय
परिचय जीवन में सफल होने के तेरह बेहतरीन टिप्स के बारे में उल्लेख करने से पहले मैं आप सबको यह बताना चाहूँगा कि ये टिप्स दुनिया के सफलतम व्यक्तियों द्वारा दिए गए हैं। लोग इस बात का रोना रोते हैं कि मेरी उम्र अधिक हो गयी, मेरा family background उतना अच्छा नहीं है लेकिन कहीं न कहीं सबके मन में एक सामान्य इच्छा ज़रूर होती है कि कैसे life में successful बनूँ।. हालाँकि लोगों के सफलता का मापदंड अलग अलग होता है। कोई पैसा चाहता है तो कोई शोहरत, कोई अच्छा family life जीना चाहता है तो कोई ऐशोआराम। इसमें कुछ लोग सफल हो भी जाते हैं और कुछ नहीं। सफलता हासिल करना उतना आसान नहीं है अपितु इसे हासिल किया जा सकता है। हालाँकि जीवन में सफल होने के कई उपाय हो सकते हैं लेकिन सफलतम लोगों द्वारा अपनाये गए उपाय अपेक्षाकृत कम श्रम साध्य होते हैं।
हमेशा बड़ा सोचो
हमेशा बड़ा सोचो ज्यादातर लोग अपना goal बहुत ही छोटा set करते हैं और उसे प्राप्त कर खुश हो जाते हैं जबकि कुछ लोग बहुत बड़ा goal पाने की कोशिश तो करते हैं लेकिन हासिल नहीं कर पाते। इसलिये आप अपना goal काफी सोच समझ कर set करें और बड़ा सोचें।
उसी काम को करें
उसी काम को करें यह पता लगायें कि आपको क्या करना अच्छा लगता है और उसी काम को करें : काम यदि आपकी रूचि के अनुसार होता है तो आप उसमे अपना 100 प्रतिशत देते हैं । यदि आप अपना काम अच्छे से करते हैं और इसके बदले आपको कुछ भी नहीं मिलता है तो आप समझिये कि आप सफलता के मार्ग पर अग्रसर हैं।
सफलता का दृढ निश्चय करो
सफलता का दृढ निश्चय करो जब आप यह निश्चय करते हैं कि चाहे कुछ भी हो, कितना भी मेहनत करना पड़े हमें अपना goal achieve करना है तो यह संकल्प हमें सफल बनाता है। इस संकल्प को निरंतर बनाये रखना पड़ता है।
असफलता से मत डरो
असफलता से मत डरो एक प्रसिद्ध उक्ति है कि असफलता का मतलब है कि सफलता का प्रयास पूरे मन से नहीं किया गया। असफलता किसी काम को दुबारा शुरू करना का एक मौका देता है कि उसी काम को और भी अच्छे तरीके से किया जाय ।
अपने जीवन को संतुलित बनाना सीखें
अपने जीवन को संतुलित बनाना सीखें हमारे जीवन में निरंतर कई तरह की लड़ाईयां चलती रहती हैं ; पारिवारिक और व्यवसायिक , शांति और कलह, आदि। हम किसी में निपुण नहीं हो सकते लेकिन इसे हम कैसे handle करते हैं यह हमारी सफलता को सुनिश्चित करती है।
अपने सफल होने की क्षमता पर विश्वास रखें
अपने सफल होने की क्षमता पर विश्वास रखें मन में यह विश्वास ज़रूर होना चाहिए कि मैंने जो सपना देखा है उसे मैं पूरा कर सकता हूँ।
कर्मठ बनो
कर्मठ बनो कुछ लोग ऐसे होते हैं तो goal तो big सेट कर लेते है लेकिन उसके अनुरूप कर्म नहीं करते है जिससे वे सफल नहीं हो पाते हैं। सफल होने के लिए goal के हिसाब से मेहनत करनी पड़ती है।
विवाद से बचें
विवाद से बचें आपके दैनिक जीवन में कई तरह के लोग आते हैं। यह बहुत आवश्यक है कि आप लोगों के साथ कैसे deal करते हैं । किसी तरह का विवाद आपके सफलता के पथ का रोड़ा साबित होगा। So avoid conflicts .
अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखें
अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखें जो व्यक्ति अपनी सोच को, अपनी मानसिक दशा को हमेशा positive रखता है उसे सफल होने से कोई भी नहीं रोक सकता। ज्योंहि हम नकारात्मक सोचते हैं हम अपने goal से दूर होते जाते हैं।
निराशा की कोई भावना आपको रोक नहीं सकती
निराशा की कोई भावना आपको रोक नहीं सकती कभी- कभी हम जब सफलता की राह पर अग्रसर होते हैं तो कुछ निराशात्मक बातें हमारे सामने आतीं हैं अगर हम उन बातों पर ध्यान न देकर सिर्फ अपने लक्ष्य के बारे में सोचते हैं तो हमें सफलता ज़रूर मिलती है।
नए विचारों, नयी योजनायें अपनाने में घबराएँ नहीं
नए विचारों, नयी योजनायें अपनाने में घबराएँ नहीं नए विचार नयी क्रांति को जन्म देती है। नए विचार, नयी योजनायें सफलता की धुरी होते हैं
सदैव कड़ी मेहनत की इच्छा बनाये रखें
सदैव कड़ी मेहनत की इच्छा बनाये रखें सफल होने के लिए आपको एक सामान्य आदमी से ज्यादा काम करना होगा तभी आप टॉप पर पहुँच सकते हो।
सदैब अपने अंतर्मन का सुनिए और पालन कीजिए
सदैब अपने अंतर्मन का सुनिए और पालन कीजिए जब भी हम कोई काम करते हैं, हम अपने आप से बातें करते हैं। हमें हमेशा अपने मन की सुनकर ही निर्णय करना चाहिए।
काम की समझ
काम की समझ यह सुनिश्चित करने के लिए कि पहले ही चरण में सारा काम अच्छे तरीके से और पूर्णत: समाप्त हो जाए, काम से संबंधित आपकी समझ बिल्कुल सही और सटीक होनी चाहिए।
थोड़ा आराम भी
थोड़ा आराम भी दोपहर के खाने के समय अपने कार्यालय के बाहर थोड़े समय के लिए घूम आएं। इससे आपकी ऊर्जा पुन: संगठित हो जाएगी और आपकी उत्पादकता में भी वृद्धि होगी। अपने काम के लिए समय का बहुत कड़ा और कठोर नियम न बनाएं। ऐसा करने से काम में होने वाली अनपेक्षित देरी को टाला जा सकता है।
खतरनाक भी हो सकता है
खतरनाक भी हो सकता है जब आपके पास काम ज्यादा होता है तो देर रात तक रुककर उन कामों को निपटाने में भी एक किस्म का आनंद मिलता है। इस चीज का भी अपना एक आकर्षण है कि ज्यादा से ज्यादा मेहनत करके काम को पूरा किया जाए। लेकिन आप और आपके स्वास्थ्य के लिए यह खतरनाक भी हो सकता है। अमेरिका में किए गए एक शोध के मुताबिक जो लोग काम के लिए निर्धारित घंटों से ज्यादा काम करते हैं, उनकी काम से संबंधित दिक्कतें और परेशानियां बढ़ जाती हैं। और जो लोग काम के लिए निश्चित घंटों में ही काम करते हैं, उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।
कठिन काम का समय
कठिन काम का समय यह सोचना छोड़ दीजिए कि अपने हाथों में जिम्मेदारी लेने और कामों का प्रतिनिधित्व करने में सदा अधिक समय लगता है। पूर्ण दायित्व के साथ काम करने के लिए निश्चित समय से अधिक तो काम करना ही पड़ेगा। खासतौर पर अगर किसी काम को कई बार करने की आवश्यकता हो, तब भी कामों को अतिरिक्त समय देने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। देखिए कि आप किस समय अपने भीतर सर्वाधिक ऊर्जा महसूस करते हैं। सबसे कठिन काम उसी समय में करें, जब आपके भीतर सबसे ज्यादा ऊर्जा हो।
पहले एक काम खत्म करें
पहले एक काम खत्म करें अगले काम की शुरुआत करने से पूर्व जो काम आपके हाथ में हैं, पहले उसे खत्म करें।
कार्य में सफल होना चाहते हैं
कार्य में सफल होना चाहते हैं यदि आप किसी कार्य में सफल होना चाहते हैं या जीवन के विशिष्ट लक्ष्य में सफल होना चाहते हो तो इन बातों पर ध्यान दे- हमेशा यह सोचे की हमें यह कार्य करना है। पूरा करना है जो भी हो। 'मुझे इसमें सफलता अवश्य मिलेगी' यह संकल्प करते रहे। अपने को करता समझें और कर। यह सोचो की करने वाले इश्वर है। इससे अहं नहीं आएगा। साथ ही जब भी कभी विषमता आएगी तो आपका आत्मविश्वास बना रहेगा। सिर्फ वर्तमान में रह कर अपने लक्ष्य को लेकर सोचें ओर करें। एक डायरी बनायें। उसमे योजना बना ले की प्रतिदिन कितना काम करना है। उसमे कितना समय देना है। प्रतिदन यह भी ध्यान दे कि आप कीतने घंटे अपने लक्ष्य के लिए समय देते है। इन घंटों को नोट करें। रोज चेक करें। दुसरे दिन की अपेक्षा आज आपने काम या पुरुषार्थ कम तो नही किया। जब तक आपका लक्ष्य पूरा न हो किसी से लक्ष्य के बारे में न कहें। अपने को हमेशा चुस्त और सफुर्तियुक्त रहें। जीवन में समय को महत्व दें। व्यर्थ चिंतन और वार्तालाप से अपने को दूर रखें। नयी जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो पूछने में कभी संकोच न करें। आत्मविश्वास बनायें रखें। प्रतिदिन मन में कहे ' मैं एक सफल इंसान हूँ और मुझे जीवन में सफल होना ही है ' समूह में रहकर अपना समय नष्ट न करें।
छोटी छोटी उपलब्धियों के साथ आगे बढिए
छोटी छोटी उपलब्धियों के साथ आगे बढिए एक बार फिर , अगर आप एक हफ्ते तक छोटे लक्ष्य के साथ शुरू करेंगे तो आप सफल होंगे. अगर किसी बेहद आसान चीज से शुरुआत करेंगे तो आप fail नहीं हो सकते. भला कौन दो मिनट तक exercise नहीं कर सकता? ( यदि आप वो हैं, तो मैं माफ़ी मांगता हूँ) और आप successful feel करेंगे , आपको अन्दर से अच्छा लगेगा. इसी feeling के साथ और छोटे-छोटे steps लेते जाइये . For example : अपनी exercise routine में दो-तीन मिनट add करिए. हर एक step के साथ (और हर स्टेप कम से कम एक हफ्ते चलना चाहिए), और आप और भी successful feel करेंगे. हर एक स्टेप बहुत बहुत छोटा रखिये और आप fail नहीं होंगे. दो महीने बाद , आपके छोटे छोटे कदम आपको बहुत सारी progress और success दिलाएंगे.
छोटे, बहुत छोटे से शुरुआत कीजिये
छोटे, बहुत छोटे से शुरुआत कीजिये अगर आपको शुरुआत करने में दिक्कत हो रही है तो शायद इसकी वजह ये है की आप बहुत बड़ा सोच रहे हैं. यदि आप व्यायाम करना चाहता हैं, तो शायद आप सोच रहे हों की हफ्ते में पांच दिन intensely workout करना है. नहीं – इसकी जगह छोटे-छोटे baby steps लीजिये. सिर्फ दो मिनट व्यायाम कीजिये. मुझे पता है ये आपको अटपटा लग रहा होगा. ये इतना आसान है, आप fail नहीं हो सकते. पर आप इसे करिए . बस कुछ crunches, 2 pushups, और वहीँ थोड़ी सी jogging. जब आपने एक हफ्ते तक ये २ मिनट तक कर लेंगे , तो इसे बढाकर पांच मिनट कर दीजिये , और एक हफ्ते तक इसे कीजिये. एक महीने में आप 15-20 मिनट करने लगेंगे. सुबह जल्दी उठाना चाहते हैं ? सुबह पांच बजे उठने का मत सोचिये, इसकी जगह आप एक हफ्ते तक बस 10 मिनट पहले उठिए . एक बार आपने ये कर लिया , तो 10 मिनट और जल्दी उठिए. Baby Steps.
जब प्रेरणा कम हो तब मदद मांगिये
जब प्रेरणा कम हो तब मदद मांगिये समस्या है? मदद मांगिये. मुझे email करिए. कोई online forum join करिए. अपने लिए कोई partner खोजिये. अपनी माँ को call कीजिये. इससे मतलब नहीं है की सामने वाला कौन है , बस अपनी समस्या बताइए , इस बारे में बात करना आपके लिए helpful होगा. उनकी advice मांगिये . उनसे आपको demotivated state से निकालने के लिए मदद करने के लिए कहिये. ये काम करता है.
इस बात को समझिये की उतार-चढ़ाव आते रहते हैं
इस बात को समझिये की उतार-चढ़ाव आते रहते हैं Motivation कोई ऐसी चीज नहीं है जो हमेशा आपके साथ रहे. ये आती है , जाती है और फिर आती है, ज्वार की तरह . इस बात को समझिये की भले ही ये चली जाए , पर वो हमेशा के लिए नहीं चली जाती . Motivation वापस आती है. बस अपने लक्ष्य से जुड़े रहिये और motivation के वापस आने का इंतज़ार कीजिय. इस दौरान अपने लक्ष्य के बारे में पढ़िए , दूसरों से मदद मांगिये , और यहाँ बताई अन्य कुछ चीजें कीजिये जब तक की आप का motivation वापस ना आ जाये.
लगे रहिये
लगे रहिये आप चाहे जो कुछ भी करिए , पर हार नहीं मानिए. भले आप आज या इस हफ्ते बिलकुल ही motivated ना feel कर रहे हों , पर अपना लक्ष्य छोड़िये नहीं. आपकी motivation फिर वापस आएगी . अपने लक्ष्य को एक लम्बी यात्रा की तरह देखिये , और बीच में जो demotivation आता है वो महज़ एक speed-breaker है. छोटी मोती बाधाएं आने पर आप यात्रा नहीं छोड़ते. लम्बे समय तक अपने लक्ष्य के साथ जुड़े रहिये , उतार-चढ़ाव पार कीजिये और आप वहां पहुँच जायेंगे.
एक लक्ष्य
एक लक्ष्य जब भी मैं थोडा down हुआ हूँ , मैंने पाया है कि अक्सर ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मेरी life में एक साथ बहुत कुछ चल रहा होता है. मैं बहुत कुछ करने की कोशिश कर रहा होता हूँ. और ये मेरी energy और motivation को ख़तम कर देता है. शायद ये सबसे common mistake है जो लोग करते हैं: वो एक साथ बहुत कुछ करने की कोशिश करते हैं. यदि एक समय में दो या उससे अधिक लक्ष्य achieve करने का प्रयास करते हैं तो आप अपनी ( लक्ष्य पाने के लिए दो सबसे महत्त्वपूर्ण चीजें ) energy और focus बनाये नहीं रख पाते. ये संभव नहीं है – मैंने कई बार कोशिश की है. आपको अभी के लिए कोई एक लक्ष्य चुनना होगा, और पूरी तरह से उसपर focus करना होगा. मुझे पाता है ये कठिन है, पर मैं अपने experience से बता रहा हूँ. एक बार आप अपना अभी का निर्धारित लक्ष्य प्राप्त कर लें फिर उसके बाद आप अपने बाकी लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं.
फायदों के बारे में सोचिये परेशानियों के बारे में नहीं
फायदों के बारे में सोचिये परेशानियों के बारे में नहीं एक common problem है कि हम ये सोचते हैं कि कोई चीज कितनी कठिन है . Exercise करना बहुत कठिन लगता है ! इसके बारे में सोचना ही आपको थका देता है.पर ये सोचना कि बजाये की कोई चीज कितनी कठिन है , ये सोचिये की उसके कितने फायदे हैं. For Example, ये सोचने की जगह कि व्यायाम करना कितना कठिन है;आप ये सोचिये की ये करने के बाद आप कितना अच्छा feel करेंगे, और long run में आप कितने healthier और slimmer होंगे. किसी चीज के फायदे आपको energize कर देंगे.
अपेक्षा करें
अपेक्षा करें ये सुनने में कुछ कठिन लग सकता है, और अकी लोग इस tip को skip कर देंगे. लेकिन ये सचमुच काम करती है. कई बार असफल प्रयासों के बाद इसी टिप की वजह से मैं cigarette पीना छोड़ पाया.अगर आपको अपना goal achieve करने की प्रेरणा मिल जाती है तो तुरंत उसे प्राप्त करने का प्रयास ना करें. हममें से कई लोग excited होके आज ही अपना काम शुरू करना चाहेंगे. ये एक गलती है. Future की कोई date set कीजिये – एक या दो हफ्ते बाद , या एक महीना भी – और उसे अपनी Start Date बनाइये. उसे कैलेण्डर पर mark कर लीजिये. उस date को लेकर उत्साहित होइए. उसे अपने जीवन की सबसे important date बना लीजिये. इस बीच अपना प्लान बनाइये. और नीचे दिए गए कुछ steps follow कीजिये. क्योंकि अपनी start delay करके आप anticipation build करते हैं और अपने लक्ष्य के प्रति अपनी उर्जा और ध्यान बढाते हैं
प्रेरणा खोजिये
प्रेरणा खोजिये मुझे उन लोगों से प्रेरणा मिलती है जिन लोगों already वो achieve कर लिया है जो मैं करना चाहता हूँ, या वो लोग जो वही कर रहे हैं जो मैं करना चाहता हूँ. मैं औरों के blogs, books,magazines पढता हूँ. मैं अपने goals को Google करता हूँ , और success stories पढता हूँ. Zen Habits ऐसी ही जगहों में से एक है, सिर्फ मुझसे ही नहीं बल्कि अन्य कई readers से जिन्होंने अद्भुत चीजें प्राप्त की हैं.
रोज़ इसके बारे में पढ़ें
रोज़ इसके बारे में पढ़ें जब मैं अपना motivation lose करता हूँ , मैं अपने लक्ष्य से सम्बंधित कोई किताब या ब्लॉग पढता हूँ. ये मुझे प्रेरित करता है और मुझे दृढ बनता है. किसी वजह से आप जो कुछ भी पढ़ते हैं वो आपको उस विषय में प्रेरित करता है और आपका ध्यान केन्द्रित करने में मदद करता है. इसलिए अगर आप पढ़ सकते हैं तो रोज़ अपने लक्ष्य के बारे में पढ़िए , खासतौर से तब जब आप motivated ना feel कर रहे हों.
उत्साहित होइए
उत्साहित होइए ये सुनने में बहुत obvious सी बात लगती है, पर ज्यादातर लोग इस बारे में अधिक नहीं सोचते हैं: अगर आप निराशा से निकलना चाहते हैं, तो किसी लक्ष्य के लिए उत्साहित हो जाइये. पर अगर आप motivated नहीं feel करते हैं तो आप excited कैसे feel करेंगे? Well, इसकी शुरुआत दूसरों से प्रेरणा लेकर होती है, लेकिन आपको दूसरों से उत्साह लेकर उसे अपनी उर्जा में बदलना होगा.मैंने पाया है कि मैं अपनी wife और अन्य लोगों से बात करके, इस बारे में ज्यादा से ज्यादा पढ़कर, और इसे visualize (दिमाग में goal achieve करने से होने वाले फायदे को देखना ) करके कि successful होना कैसा लगेगा, excited feel करने लगता हूँ. एक बार ये कर लिया तो बस इसी energy को आगे carry करने और आगे बढ़ने की ज़रुरत रहती है.
सार्वजनिक रूप से प्रतिज्ञा लीजिये
सार्वजनिक रूप से प्रतिज्ञा लीजिये कोई भी दूसरों के सामने बुरा नहीं दिखना चाहता है . जो बात हमने publicly कही है उसे करने के लिए हम extra effort करते हैं. For example, जब मैं अपनी पहली मैराथन दौड़ दौड़ना चाहता था , तब मैंने अपने local newspaper में इस बारे में एक column लिखना शुरू कर दिया. Guam की पूरी आबादी मेरे इस goal के बारे में जान गयी. अब मैं पीछे नहीं हट सकता था , हालांकि मेरी motivation कम -ज्यादा होती रही पर मैं इस goal को पकडे रहा और दौड़ complete की.आपको किसी newspaper में अपना goal commit करने की ज़रुरत नहीं है , पर आप इसे अपने family,friends, और co-workers से बता सकते हैं, और यदि आपका कोई blog है तो उसपर भी इस बारे में लिख सकते हैं.और खुद को जिम्मेदार ठेराइये – केवल एक बार commit मत करिए , बल्कि अपने progress के बारे में सभी को हर हफ्ते या महीने update करने के लिए भी commit करिए.
मदद लीजिये
मदद लीजिये अकेले कुछ हांसिल करना कठिन होता है. जब मैंने मैराथन में दौड़ने का निश्चय किया था , तो मेरे साथ दोस्तों और परिवार का support था, और साथ ही Guam में दौड़ने वालों की एक अच्छी community भी थी जो मेरे साथ दौड़ते थे और मुझे encourage करते थे. जब मैंने smoking quit करनी चाही तो मैंने एक online forum join कर लिया , जो मेरे लिए बहुत helpful रहा. और इस काम में मेरी wife Eva ने हर कदम पर मेरा साथ दिया. मैं उसकी और अन्य लोगों की मदद के बिना ऐसा नहीं कर पाता. अपना support network खोजिये , अपने आस-पास या online या दोनों जगह.
अपना लक्ष्य प्रकाशित करें
अपना लक्ष्य प्रकाशित करें अपने goal का एक बड़ा सा print निकाल लें. अपना लक्ष्य कुछ ही शब्दों में लिखें , जैसे कोई मन्त्र (“Exercise 15 mins. Daily”), और उसे अपने दीवार या फ्रिज पर चिपका दें. इसे अपने घर में अपने office में लगा लें उसे अपने computer के desktop पर लगा लें. आप अपने goals के लिए बड़े reminders लगाना चाहते हैं , ताकि आप अपने goal पर focus कर पाएं और उसे लेकर excited रह पाएं. अपने goal से सम्बंधित कोई picture लगाना भी helpful हो सकता है
नकारात्मक विचारों को त्यागिये
नकारात्मक विचारों को त्यागिये अपने विचारों को monitor करना ज़रूरी है. आप जो negative self-talk करते हैं, जो दरअसल आपको demotivate कर रहा है उसे पहचानिए. कुछ दिन बस ये जानने में बिताइए कि आपके अन्दर कौन कौन से नकारात्मक विचार हैं, और फिर कुछ दिनों बाद उन्हें एक bug की तरह अपने अन्दर से निकालिए , और फिर उन्हें corresponding positive thought से replace कर दीजिये . अगर आप सोचते हैं कि ,” ये बहुत कठिन है” तो उसे ” मैं ये कर सकता हूँ” से बदल दीजिये . अगर वो Leo इसे कर सकता है , तो मैं भी! ये कुछ अटपटा सुने देता है , पर ये काम करता है. सचमुच.
परिचय
परिचय हम अपने जीवन में सफल होने के लिए बहुत तरह से सोचते हैं ,परेशान होते हैं । इस भागमभाग में तनाव ,चिंता ,दुःख आदि घेर लेता है । हम बिना सोचे करते चलते हैं फ़िर सोचते हैं इतनी मेहनत करते है पर संतुष्टि नही आती ,कही पर कुछ कम लगता है या खिन्नता रहती है इसका कारण ये होता है की हम जानते ही नही की कार्य की कुशलता में कमी कहाँ हुई है । सफलता का अर्थ है किसी कार्य को कुशलता के साथ पूरा
कठिन परिश्रमी ब्यक्ति ही सफलता पाता है
कठिन परिश्रमी ब्यक्ति ही सफलता पाता है एक कठिन परिश्रमी ब्यक्ति ही सफलता पाता है और अपने कारण पाता है दूसरों के कारण नही इसीलिए सफल व्यक्ति याद किए जाते हैं
तभी सफलता प्राप्त होगी
तभी सफलता प्राप्त होगी किसी भी कार्य को पूरी तरह करने के लिए कुशलता के साथ कार्य की निरन्तरता भी आवश्यक होता है । ऐसा नही करना चाहिए की आज किया फ़िर कुछ दिन आराम करें फ़िर करे ,ऐसा करने से कार्य तो रुकता ही है वह ठीक तरह से होता भी नही क्यों की एकाग्रता भंग होती है मन उतना नही लगता जितनी उस कार्य को जरुरत होती है और सफलता भी रुक जाती है आपके साथी आपसे आगे हो जाते हैं इसलिए अपने काम को एक रफ़्तार देनी होगी तभी सफलता प्राप्त होगी ,आवश्यक समय और प्रयास निरंतर देना होगा । सफलता कोई ऐसी वास्तु नही है की आपने माँगा या चाहा और आपको मिल गई इसे तुंरत प्रस्तुत नही किया जा सकता इसमे लगातार परिश्रम करना होगा
अयोग्यता, अनुशासन की कमी
अयोग्यता, अनुशासन की कमी अयोग्यता ,अनुशासन की कमी ,ज्ञान का आभाव और भाग्य वादी दृष्टिकोण भी सफलता की राह में बाधक होते है ,सफल होने के लिए छोटे -छोटे काम को भी धैर्य के साथ मन लगा कर करना चाहिए ।
जिज्ञासा का भाव
जिज्ञासा का भाव जिज्ञासा का भावः और उस पर चर्चा हमें नए आयाम देती है सोचने का दायरा बड़ा बनाती है और खोज का रास्ता दिखाती है । जिज्ञासा एक नए प्रकार से समाधान करना भी बताती है और यह हमें सफलता की ओर ले जाती है
सोच को सकारात्मक रखे
सोच को सकारात्मक रखे अपनी सोच को सकारात्मक रखे पर हर किसी पर भरोसा न करे । ईर्ष्यालू प्रवृत्ति के लोंगो से दूर रहे ये आपको राणे पर विवश कर देंगे और इस तरह के दांव -पेंच भरी बातें करेंगे की आप लोंगो के बीच शर्मिंदा हो सकते हैं । ऐसे लोग मौका खोजते रहते है । किसी की निंदा से भी अपने को दूर रक्खे । सामंजस्य को बढ़ाने की कोशिश करें एक बेहतर इन्सान बने सफलता जरुर मिलेगी ।
सफलता कुछ अनुपात में
सफलता कुछ अनुपात में सफलता पाने के लिए उसकी ऊंचाई और अपना स्थान जान ले की आप कहाँ है और अभी कितना जाना होगा हम में कितनी कुशलता है ,क्या कमी है ,क्या खूबी है क्या अच्छा है क्या ख़राब है । मुझमे क्रोध ,ईष्या ,अहंकार ,अज्ञान-प्रेरणा ,संवेदना ,विनम्रता क्या सब कुछ अनुपात में है ।
सफल व्यक्ति के काम करने का तरीका
सफल व्यक्ति के काम करने का तरीका एक सफल व्यक्ति के काम करने का तरीका अलग होता उसका चिंतन लीक से हटकर होता है । वे यह नही देखते की अमुक ने इसे ऐसे किया है तो हम भी इसी तरह करे वे उससे बेहतर तरीका खोज लेते हैं । सफल व्यक्ति काम के प्रति गहरी समझ और समर्पण रखते हैं । वे काम के रास्ते में आने वाली रुकावटों के प्रति लापरवाह होते हैं ।
सफल होने के लिए क्रोध पर नियंत्रण
सफल होने के लिए क्रोध पर नियंत्रण सफल होने के लिए क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए कभी -कभी यह बहुत कठिन हो जाता है पर इसका दूर गामी परिणाम अच्छा होता है । यह एक प्रकार की साधना है कोई आपकी आलोचना करे तो क्रोधित न हो इसी प्रकार कोई प्रशंसा करे तो खुश भी नही होना चाहिए दोनों स्थितियों में सहज भाव प्रदर्शन करना चाहिये ,सम दृष्टि रखना चाहिए । कुछ लोग कहते हैं परिवार की एकता के लिए किसी के बुरे वर्ताव पर ध्यान नही देना चाहिए पर ये ठीक नही लगता एक सीमा के बात किसी का बुरा वर्ताव सहना कठिन लगने लगता है .कुछ लोग कहते है बड़े कुछ भी कहे उसे आर्शीवाद मानना चाहिए पर बड़े जब सरेआम अत्याचार करने पर ,आरोप और लांछन लगाने पर उतारू हो तो चुप हो कर रहना उनके आरोपों को सही साबित करना है .और अगर कोई द्वेष वश कुछ हानि करे सामजिक या आर्थिक ,परिपक्वा अवस्था में होने के बाद भी बार बार दुष्टता पूर्ण वर्ताव किए जा रहा है तो क्षमा करना मुश्किल हो जाता है ऐसे में स्वाभिमान की रक्षा नही होती तो एक दिन भयावह स्थिति आ जाती है और हम उसके शिकार होगे इसलिए इसका ख्याल रखना चाहिए की यह सब एक सीमा तक ही ठीक है । जब सीमा पर होने लगे तब स्वयं को उनके दुर्व्यवहार का पात्र नही बनने देना है । परिवार हो या रिश्ते दार किसी को यह हक़ नही है की वो हमेशा नीचा दिखाने का अवसर खोजता रहे मेरे विचा से मेरे क्या इस विचार से हर कोई सहमत होगा अपशब्द कहने का अधिकार किसी को नही है ,परिवार का ही कोई भी हो अगर वह सामाजिक लिहाज नही रखता तो ऐसे व्यक्ति से मिलने में भय लगता है ।
सफलता में ईश कृपा भी रहती है
सफलता में ईश कृपा भी रहती है हमारी सफलता में ईश कृपा भी रहती है और कृपा पाने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए । प्रार्थना में बड़ी ताकत होती है अगर ऐसा न होता तो इसका वजूद न बना रहता । इस अभिव्यक्ति में बड़ी ताकत है इससे क्षमा की शक्ति बढ़ जाती है ,मन शांत होता है और हमारी आंतरिक उर्जा का विकास होता है । कभी -कभी हमारी कामना उसकी और से नही सुनी जाती इसका अर्थ यह है की रुको अभी वक्त नही आया है,, हो सकता है हमने जो माँगा है कुछ समय बाद वो हमें इससे बेहतर देना चाहते हो । कभी तो उसकी तरफ़ से एकदम निषेध हो जाता है और कभी कामना पूर्ण हो जाती है । उसके निषेध को भी हमें सकारात्मक दृष्टि से देखना चाहिए ,उसे ईश्वर की सद इच्छा मान कर सहर्ष रहना चाहिए ।
सदगुण एक सफल व्यक्ति को धारण करता है
सदगुण एक सफल व्यक्ति को धारण करता है सद्गुण और मूल्यों का समावेश इंसान को बेहतर बनाता है और ऐसा इंसान ही एक सुंदर परिवार बनता है और परिवार से समाज फ़िर समाज से देश सुंदर बनता है । सद्गुणी इंसान सबको प्रिय लगता है ,और जो हमेशा खुश रहता है उसके आसपास सब कुछ मुस्कुराता हुआ होता है । सदगुण एक सफल व्यक्ति को धारण करता है । सदगुण व्यक्ति में हीन भावना नही आने देती है वह विपरीत समय को अनुकूल बना लेता है और आत्म विश्स्वास से सकारात्मक बदलाव लाता है ।
कुशलता पूर्वक सफलता
कुशलता पूर्वक सफलता किसी कार्य को कुशलता पूर्वक सफलता की और ले जाने के लिए उद्देश्य ,सिद्धांत ,योजना ,अभ्यास ,धैर्य ,साहस और सतत प्रयास की जरुरत होती है .कई बार गलतियाँ भी होती हैं और असफलता भी मिलती है पर उन गलतियों से सबक लेना चाहिए गलती को सुधर लेने पर सफलता हाथ आती है अन्यथा नही जब तक गलतियों को सुधरने का प्रयास नही करेंगे तब तक सफलता की राह में रुकावट आती रहेगी
सफलता पाने के लिए तन और मन दोनों स्वस्थ रहना चाहिए
सफलता पाने के लिए तन और मन दोनों स्वस्थ रहना चाहिए रहता है पौष्टिक आहार से मन स्वस्थ रहता है खुश रहने से ,आस्था की राह मन को ताकत देती है मन की ताकत में धर्म का अहम् कार्य होता है । अगर आप धार्मिक है तो धैर्य अवश्य होगा ,आत्म नियंत्रण होगा ,मन में हमेशा एक उर्जा का प्रवाह बना रहेगा ,वह कभी ग़लत काम नही करेगा एक धार्मिक व्यक्ति में उसूल होते है जिनके ख़िलाफ़ वह कभी नही जाता और नीतिक जीवन जीता है ।
कभी कभी सफल न होने पर
कभी कभी सफल न होने पर कभी कभी सफल न होने पर ,यह सोच कर बैठ जाना की यह नही हो रहा -नही कर पा रहा यह सोच कर काम न करना कमजोरी है ,या काम न करने का बहाना भी हो सकता है ।
जीवन में सफल होने के लिए
जीवन में सफल होने के लिए जीवन में सफल होने के लिए कार्य की कुशलता और लगन मूल मन्त्र होना चाहिए । तनाव के साथ काम करना काम को बिगाड़ देता है काम कुछ भी हो कोई भी हो मन लगा कर करना ,सफलता का सूत्र है ।
जीवन में सफल होने के लिए दृढ़ बुद्धि होना चाहिए
जीवन में सफल होने के लिए दृढ़ बुद्धि होना चाहिए जीवन में सफल होने के लिए दृढ़ बुद्धि होना चाहिए और कोशिश होनी चाहिए की किसी को पीडा दिए बिना अपने विकास का समर्थन करना चाहिए । ध्यान दे दृढ़ प्रतिज्ञ होना और हठी होना दोनों में अन्तर है दृढ़ प्रतिज्ञ वो है -जो शांत भाव से सहज रूप से अपने लक्ष्य को अपनी कर्मठता और योग्यता के द्वारा पाने में लगा रहता है दूसरी ओर एक हठी ब्यक्ति अपनी इक्षा पूरी न होने पर दोषारोपण करता है ,चीखता है ,हल्ला मचाता है और अपना काम निकलने के लिए भयभीत भी कर सकता है । दृढ़ प्रतिज्ञ व्यक्ति आत्म विश्वाशी होता है वो अपने काम और कर्तव्य का इमानदारी से पालन करता है और सकारात्मक तरीके से कौशल बुद्धि का इस्तेमाल कर के अपनी मंजिल पा लेता है । जीवन की सफलता में हमारे परिवार ,रहन सहन ,हमारा स्तर ,और परिवार में बेबाकी का भी गहरा प्रभाव होता है ,अगर परिवार में आपके विचार नही सुने जाते या आप खुल कर कह नही पाते तो जीवन में असंतोष ,अकेला पन बढ़ जाता है । हमारे सोच में दृढ़ता नही आती । परिवार का समर्थन हमें एक मजबूत सोच देता है बस हमें कारण सहित अपना समर्थन लेने की कला आनी चाहिए ,अच्छी तरह मालूम होना चाहिए की हमें क्या करना है, हमारे कार्य का परिणाम भी अच्छा हो ।" बन्दर बुद्धि "नही होनी चाहिए । जो घबराया सा रहे ,हर क्षण बात को बदले ,सवालो से बचने के लिए ख़ुद को व्यस्त दिखने की कोशिश करे ,आदर्श को झाडे उसे बन्दर बुद्धि कहते हैं ऐसे लोग अपने को प्रमाणित करने के लिए एक के बाद एक गलतियाँ करते जाते है स्थिर नही होते न तन से न मन से । ह्रदय को पूर्णतया मुक्त करें अपनी गलती को जानने और मानने में संकोच न करे इससे और अधिक सीख सकेंगे । अपनी कीमत करे ,अपनी इज्जत करें । स्वयं को साक्षी मान कर जीवन को सवारें । आपका आत्मविश्वास बढेगा ।
सफलता का सूत्र हम एक बच्चे से लेते है
सफलता का सूत्र हम एक बच्चे से लेते है एक बालक हमेशा प्रसन्न रहता है उसे किसी का न भय होता है न शोक वह एक नियम के तहत जीवन में बढ़ता जाता है । बछा नही जानता इर्ष्या क्या होती है ,शत्रुता क्या होती है ,वह केवल प्रेम की भाषा जानता है भेद दृष्टि उसमे नही होती बच्चे ग़लत नही बोलते वो हमेशा वही कहते है जो देखते है मुझे याद है हमारा "विकास " कच्छा ६ में पढता था एक बार घर के सामने कुछ बच्चो के साथ कल रहा था कुछ देर बाद आकर कहा माँ मैं उसके साथ नही खेलूँगा क्योकि वो चीट कर रहा है ,तो उस समय उसे पता था की जो है उसके कहना ग़लत है । तो बच्चे झूठ तब बोलते है जब वो बराबर इस तरह के हालत में जीते है । उनका कोई बहुत प्यारा खिलौना अगर टूट जाय तो जरा देर में फ़िर खुश हो जाते है भूल जाते है की उनकी कोई प्रिय वास्तु छूट गई । बच्चो के निर्मल स्वभाव सबको प्रिय लगते है कुछ बड़े होने पर उनको विशेष देख रेख की जरुरत होती है उनको तराशना पड़ता है प्रकार से ताकि एक कामयाब इंसान बन सके । गलती जान बूझ कर हो या अनजाने में उसकी सजा भोगनी पड़ती है ठीक उसी प्रकार जैसे अनजाने में पिया गया जहर भी अपना काम करता ही है । इसलिए कहा है कर्म फल पीछा नही छोड़ता हमारे मनीषियों ने श्रेष्ठ कर्म की बात कही है ताकि जीवन उन्नत हो । मनुष्य के अन्दर एक ही अवगुण कभी -कभी उसके पतन का कारण बन जाता है । आज कल एक लफ्ज बहुत सुनने को मिलता है की -सब चलता है ,सब चलता है की धारणा कई समस्या को अनायास जन्म देती है और ग़लत करने में मददगार भी होती है, गलती के प्रति संकोच ख़तम कर देती है ,लोगों के प्रति आदर और अदब ख़तम कर देती है इस लिए यह सोचना बिल्कुल ग़लत है की सब चलता है । -अगर आपने ब्यवहार पर ध्यान नही दिया तो यह भी हो सकता है की आप जीवन भर ठगे जाय । -एक छोटा आदमी भी आपका अपमान कर सकता है या फ़िर आपको उचित मान नही देगा । -अगर आपकी यह धरना है की सब चलता है तो फ़िर आपने अपनी बुद्धि से नही सोचा । आपका कोई विचार स्तर नही है । जब अपना कोई विचार ही नही है तो विकास कैसे होगा । -सब चलता है -इस सोच वाले कभी इधर कभी उधर होते रहते है ,हम अपने खिलाफ आवाज भी नही उठा सकते क्यों की आत्मबल होगा ही नही । -अच्छा और बुरा दोनों चलने में हम कही के नही रहते । हमारे वसूल ,विचार ,नियम ,सिद्धांत सब ख़तम हो जाते हैं । अगर हम कुछ करना चाहते है तो सब ठीक हो इसके लिए सब कुछ नही चला सकते कुछ अच्छा चलाना पड़ेगा तभी अच्छा होगा । -अच्छा हो इसके लिए एक अच्छा रास्ता ,सफलता का रास्ता चुनना होगा "सब चलता है "इससे बहार आना होगा ,उदासीन सोच को बदलना होगा । कुछ भी ही जाय हमें हमेशा जीवन का उजला पक्ष ही देखना चाहिए और उसे पाने की भरपूर कोशिश करनी चाहिए हजार गलती करके भी ,और बार बार गिर कर भी परेशां नही होना चाहिए आशा का दीप जला रहना चाहिए प्रकाश जरुर मिलेगा । आज जो विकास हमारे जीवन में है यह हजारो वर्षो की खोज का नतीजा है ख़ुद को विकसित करके ही हम आज यहाँ तक आए हैं ,यमराज से भी नही हारना चाहिए हम नचिकेता की संतान हैं ।
ज्ञान एक प्रकार की शक्ति है
ज्ञान एक प्रकार की शक्ति है ज्ञान एक प्रकार की शक्ति है इसे कब, कैसे प्रयोग करे इसका सटीक ज्ञान ही हमारे जीवन की दिशा और दशा दोनों को बदल देता है । हमारे मस्तिष्क में उठते अच्छे और बुरे विचार भी इसमे सहयोग करते हैं । इसलिए कहा है हमेशा विचारों पर नियंत्रण रखना चाहिए ये हमारी सफलता में सहायक होते हैं । जीवन में लक्ष्य स्पष्ट हो तथा कार्य और विचार का अच्छा ताल -मेल हो तो सफलता निश्चित होती है हमारा मस्तिष्क असीम क्षमता वाला होता है हम इसका कितना प्रयोग करे यह हम पर निर्भर है । जीवन में सामना के बदले सहयोग और अपने काम में हमेशा सृजन को प्रथम रखना चाहिए । हमसे अमुक कार्य नही होगा ऐसा न सोचे । जीवन ख़ुद किनारे लग जायगा यह सम्भव नही ।
सफलता के कुछ सूत्र
सफलता के कुछ सूत्र १-हमेशा उर्ध्वगामी बने रहो । २-सुनो ज्यादा बोलो उतना ही जितनी आवश्यकता हो । ३-शांत रहो उचित आराम और काम दोनों जरुरी हैं । ४-कारण और सिद्धांत पर टिके रहो । ५-हमेशा उस विराट को अपने में महसूस करो । ६-याद रखो जन्म गरीबी में हो सकता है पर जीवन भर गरीब रहो ये न होने देना अपने हाथ में है । ७-दुर्जनों का संग उनकी प्रशंशा से सज्जनों की गाली अच्छी है । ८-सबके गुन और अपने अवगुण पर ध्यान दो । अच्छी आदतें आती हैं मुश्किल से ,प्रयास से पर उनको अपना कर जीवन सुखद बनता है ,दूसरी तरफ़ बुरी आदते आती है बड़ी आसानी से इतनी आसानी से की पता भी नही चलता पर जीना बड़ा मुश्किल कर देती है अशांति उपहार में मिलता है इसलिए अच्छी आदतों का व्यसन बनालो जीना अच्छा लगेगा ।
सफलता का कोई एक क्षेत्र नही होता
सफलता का कोई एक क्षेत्र नही होता सफलता का कोई एक क्षेत्र नही होता यह अपनी इक्षा पर निर्भर है की आपकी नजर में सफलता क्या है कोई यश और सम्मान में सफल होना चाहता है ,कोई धन और पद में ,कोई विद्या और बुद्धि को श्रेष्ठ मानता है परन्तु सफलता कई प्रकार से हो तभी जीवन पूर्ण होता है । धन हो यश हो विद्या हो ,साहस ,आत्मबल और प्रतिष्ठा हो इन सब को मिला कर एक सफल व्यक्ति बनता है । पूर्ण रूप से सब कुछ तो सब में नही होता पर जो गुण नही है उसे उभारने के लिए विवेक और सम्यक कर्म का गुण बढ़ाना चाहिए । विवेक के बिना संकल्प नही लिया जा सकता अविवेकी बल भी किसी काम का नही है और बुद्धि तो विवेक के बिना शून्य है । अविवेकी बुद्धि बंधन है ।
सफलता में विकास का सम्बन्ध
सफलता में विकास का सम्बन्ध सफलता में विकास का सम्बन्ध हो तो जादुई व्यक्तित्व का निर्माण होता है और व्यक्ति महान बन जाता है । हर कोई चाहता है सफल होना अमीर ,गरीब ,गृहस्थ ,व्यापारी और धार्मिक सभी अपने को शिखर पर देखना चाहते है ,अपने कार्य क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं । हमारा योग शास्त्र कहता है कुछ नियमो का पालन करो अवश्य विकास होगा । यदि हम अपनी सूक्ष्म गतियों पर निगाह रख साके तो कार्य और कारण का विश्लेषण कर सकते हैं और जब यह ज्ञान हमें हो जायगा तो काम बनेगे । हमारी शक्ति तो सूक्ष्म में है -मन में ,बुद्धि में ,विचार में और वो जब नियंत्रित होगा तो कुशलता बढेगी ,इसकी मात्रा इसकी पवित्रता पर होती है की हम कितना पवित्र सोचते है ,एक सदाचारी ही स्वयं पर नियंत्रण रख सकेगा । ऐसा करके हम अनायास ही बहुत सारी कठिनाइयों से स्वतः निकल जाते हैं और असफलताएं टाली जा सकती हैं ।
साहस और सत्य संकल्प से सफलता मिलती है
साहस और सत्य संकल्प से सफलता मिलती है अगर आप में कोई अवगुण है जो आपकी सफलता में बाधक है तो खोज कर उसे दूर करें । उसे छिपाने की ,दबाने की कोशिश न करे आज आदमी जीवन की तैयारी में सही राह से भटक गया है उसे अपनी कमी नही दिखती । वह जीवन की सुन्दरता से ,प्रकृति की सुन्दरता से ,छोटी -छोटी खुशियों से दूर होता जा रहा है एक प्रकार से बनावटी और दिखावे का जीवन अपनाता जा रहा है । परिस्थिति का सामना साहस से करे ,और सच्चाई को नजर अंदाज न करे । आप उदास है ,चिंता में हैं तो विवेक पूर्ण निर्णय लेने के लिए विचार -विमर्श करिए । एक कागज़ पर अपने नकारात्मक भावों को लिखिए ,पढिये और उसे कैसे सुलझाएं इस पर विचार करिए संदेह मिट जायगा ,रह मिल जायगी । अपनी कुशलता को बढ़ने के उपाय सीखे ,अगर कही काम करते है तो छुट्टी के दिन अपनी कुशलता को बढ़ने का कार्य करें । अपने आस -पास का वातावरण सुंदर ,स्वच्छ व् महकता हुआ रखें ।
नर हो न निराश करो मन को
नर हो न निराश करो मन को मनुष्य को हार से ,दुःख से घबराना या निराश नही होना चाहिए यहाँ कोई ऐसा नही है जो सब तरह से पूर्ण हो पर जीवन में सफलता और पूर्णता को प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना ही चाहिए । हम आपको अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहिम लिंकन का उदाहरन अवश्य देना चाहते हैं -अब्राहिम लिंकन का वास्तविक जीवन असफलताओं से भरा था । उन्हें सौ में से निन्न्यांवे बार असफलता का मुख देखना पड़ा था पर उन्होंने जीवन में हिम्मत नही हारी अपना काम साहस और धैर्य के साथ करते रहे । उन्होंने जिस भी काम में हाथ डाला असफलता ही मिली । उनका जीवन निर्वाह ,रोज की जरूरते मुश्किल से पूरी होती थी । इन सब परेशानियों के बीच लिंकन ने वकालत भी की पर कोर्ट में बैठने पर उन्हें मुक़दमे ही नही मिले यहाँ भी असफल हुए ,शादी की वह औरत भी उनका साथ नही निभा सकी ।
असफल होने पर निराश न हो
असफल होने पर निराश न हो असफल होने पर निराश न हो । १०० बार गलती होने पर भी प्रयास न छोड़े । हार न माने हमारे ऋषियों ने चीटी को भी अपना गुरु माना और निरंतर चलते रहना अपने वजन से अधिक भार उठाने की क्षमता चीटियों से सीखा। -संघर्ष से ही कुशलता बढती है । कठिनाइया एक नया सबक देती हैं -महाकवि काली दास और व्यकरण के रचयिता पाणिनि ये दोनो महा मूर्ख कहे जाते थे । समय की ठोकरों ने इनकी चेतना को जगाया और महान कवि बना दिया । कामयाबी इनको तकदीर से नही मिली । जीवन के अपमान और ठोकरों के घाव ने इनकी चेतना को जागृत किया ,ठोकरें इनकी प्रेरणा बन गई । अगर आप ठान ले तो जरुर सफल होंगे । -एक आदमी जो पाता है वही खा जाता है उसके खाने पीने का कोई नियम नही है सेहत का ख्याल न रख कर जो पसंद है वो खाता है ,एक दिन मोटा होकर बीमारी का शिकार हो जाता है । कोई नशा करता है यह जानते हुए की नशा करना हानिकारक है फ़िर भी करता है ,एक व्यक्ति जो निरर्थक संवाद करता है ,झगडा -झंझट करता है ,अपने अहंकार में रहता है ये सारे लोग अपने जीवन में कठिनाइयों को ख़ुद बुलाते है ऐसे लोग अपने में सुधर करके अपना जीवन सवार सकते हैं । सफल बन सकते हैं । जीवन के कोई भी महत्व पूर्ण फैसले जल्दबाजी में न करें ,पूरे हालत को समझ कर निर्णय लेना चाहिए । -कई बार ऐसे मौके भी आते हैं जब अपने जमीर के खिलाफ जा कर भी काम करना पड़ता है ऐसे में अपना धीरज नही खोना और सही वक्त का इन्तजार करना चाहिए । यह अपनी सूझ पर निर्भर करता है की आप इससे कैसे निकले ,अपने क्षमता को परखने का यही मौका होता है । -प्रबल इक्षा ही आपको सफल बनाती है आप तब कई प्रकार से सोचने लगते हैं उन्ही में आपको हल मिल जाता है। -जीवन में कुछ मूल्य अवश्य होने चाहिए ,अपने पैसे का नाजायज इस्ते माल न करे क्यों की इससे कभी आपको दुःख मिल सकता है । जीवन में हारना नही है यह भाव एक सुरक्षात्मक आवरण में रखता है । हमें जीतना है यह भाव हमें मुकाबले के लिए तैयार करता है । अपनी शक्ति को पहचानने का मौका देता है । कठिन श्रम से ही जीत हासिल होती है । सफल होना अचानक नही होता इसकी पृष्ठभूमि तैयार करनी पड़ती है । दिल ,दिमाग ,आँख ,कान ,श्रम सब कुछ लगाना पड़ता है । आलोचना भी होती है पर दृढ़ रकार अपना काम करना चाहिए । कुछ लोग क्यों असफल रह जाते हैं - -कठिन श्रम करके भी सफलता का स्वाद न मिले तो विचार करे कही आप में निम्न कमियां तो नही हैं १-क्या आप बहुत जल्द अपने सफलता को पाना चाह रहे हैं । २- कही आपके काम करने के तरीके में गलती तो नही है कोई बाधा जिसे आप नजरअंदाज कर रहे हों । ३- श्रम में कमी या अरुचि तो नही है । ४-अगर आपका काम योजना बद्ध नही है तो रुकावट आएगा और आर्थिक नुकसान भी होगा । ५-दृढ़ता की कमी ,गलती के प्रति सावधान न होना ,या विरोध न प्रकट करना भी असफलता का कारण होता है । ६- सफलता का एक बहुत छोटा सा सूत्र है -कुछ किए बिना ,कुछ नही पा सकते । श्रम करने से बचना असफलता का कारण होता है । ७- भाग्य के भरोसे बैठे रहना ,अपनी कोशिश न करना ,अपने विचार से न सोचना । ८- सफलता न कोई देता है ,न कही मिलती है इसे पाने के लिए जिन्दगी को सही राह पर ले जाना पड़ता है । असफलता के लाख बहाने होते हैं जैसे -यह मेरे नसीब में नही था ,मेरी किस्मत ख़राब है ,अब मेरी उमर अधिक हो गई है ,मुझे चालाकी नही आती आदि -आदि । उसने सारा दिन काम किया और सारी रात काम किया ,उसने खेलना छोड़ा और मौज मस्ती छोड़ी ,उसने ज्ञान के ग्रन्थ पढ़े और नई बातें सीखी ,वह आगे बढ़ता गया पाने के लिए सफलता जरा सी ,दिल में विश्वास और हिम्मत लिए वह आगे बढ़ा और जब वह सफल हुआ ,लोगों ने उसे भाग्यशाली कहा ॥ अज्ञात सफलता का एक अहम् पहलु है प्रेरणा ,बिना प्रेरित हुए कोई कुछ नही कर सकता । प्रेरणा के लिए संगत ,परिवेश और अपनी इक्षा का होना आवश्यक है । हम अपनी प्रेरणा शक्ति को कैसे बढ़ा सकतें हैं ,जगा सकते हैं इस पर चर्चा करतें हैं -
अपने भाग्य के निर्माता बनिए
अपने भाग्य के निर्माता बनिए बिना आपके प्रयास किए आपका भाग्य नही बदल सकता । एक बात सुनिश्चित है की अपने कर्मों के द्बारा ही भाग्य बदलता है । जैसा आपका प्रयास होगा ,जैसा आपका कर्म होगा उसी प्रकार किस्मत का निर्धारण होगा । जो आदमी कुछ नही करेगा वो कैसे कल्पना कर सकता है की उसे क्या बनना है । कर्म हीनता ही व्यक्ति को अभागा बना देती है । आलसी व्यक्ति के अन्दर स्वत: कई प्रकार की बुराईया आ जातीं हैं वह ख़ुद को असहाय समझने लगता है । कई बार व्यक्ति निजी स्वार्थ या ईर्ष्या वश कई ऐसे कार्य कर देता है जो उसकी बदनामी का कारण बनता है । वह अपयश का भागी बनता है । ऐसे कार्य को ही निकृष्ट कर्म कहते हैं । कर्म करने से पहले उसके परिणाम और अगर कुछ बुरा हुआ तो उससे निपटने के क्या उपाय होंगे इस सब पर विचार करके ही काम को करना चहिये । कुछ लोग तुरत परिणाम की अपेक्षा करने लगते है लंबा इन्तजार करना पड़ेगा इसलिए बीच में ही काम को रोक देते हैं । संघर्ष से घबराते है पर जैसा आपका काम होगा उसी के अनुरूप आपको फल भी मिलेगा । कभी -कभी परिस्थिति वश देर हो सकती पर अच्छे काम का सुखद परिणाम ही आएगा । यही बात भगवान् कृष्ण ने गीता में कही है -कर्म पर आपका अधिकार है फल पर नही । अर्थात आप जब चाहें श्रेष्ठ कर्म कर सकतें हैं परन्तु उसका फल आप अपने अनुसार नही पा सकते यह काम ईश्वर का है इसलिए आप केवल कर्म करिए कर्म के अनुसार ईश्वर आपको फल देगा इन्तजार करिए । आपके श्रेष्ठ कर्म का श्रेष्ठ फल मिलेगा निम्न कार्य का फल भी उसी प्रकार होगा । जरुर मिलेगा । साहस का काम करने वालों के लिए खतरा बना रहता है लेकिन काम को करने वाले इसी में अपना काम करते हैं और खतरों से सावधान रहते हैं वे काम में सावधानी का ख्याल रखते हैं । कुछ काम ऐसे होते है जिसमे गलती होने के आसार बने रहते है जैसे बिजली का काम या कोई सामान तो अगर उसको करने में गलती हो जाय तो यह न सोचिये की गलती हो गई आपका भाग्य ख़राब था या अन्य कुछ पुनः करिए और सावधानी बढ़ा लीजिये । हम अपने जीवन में भी अपनी बुद्धि और विवेक का साथ लेकर बहुत कुछ कर सकतें हैं अगर साधनी से काम नही करेंगे तो डूबना तय है । ईश्वर की सर्व श्रेष्ठ रचना है मनुष्य इसलिए जो कुछ श्रेष्ठ है वो सब पाने का अधिकार मनुष्य को है । उसे श्रेष्ठता पूर्वक जीवन को जीना चाहिए । अपने व्यवहार ,विचार बुद्धि कौशल ,रहन -सहन सब श्रेष्ठ बनाना चाहिए । मनुष्य अगर ऊपर न उठा ,ऊँचा न सोचा ,मानव संवेदना उसमे न आई .तो वह असफल ही कहा जायगा । दृढ़ बुद्धि ही कार्य करने की प्रेरणा देती है ,प्रतिकूलता में भी धैर्य खोने नही देती । क्या छोटा क्या बड़ा ,क्या कठिन ,क्या सरल चाहे जैसा भी कार्य हो दृढ़ बुद्धि वाला घबराता नही । वह केवल अपने काम में लगा रहता है । हर मनुष्य पूर्णता प्राप्त कर सकता है और आज का आदमी तो प्रकृति पर भी विजय पा लिया है ,कोई कार्य उसके लिए असम्भव नही है फ़िर भी अगर आप कुछ करने से घबरातें है तो इसमे आपकी कमी है । भय और भ्रम से बाहर निकल कर निडर होकर सफलता की ओर कदम बढ़ाये
सफलता संघर्ष से मिलती है
सफलता संघर्ष से मिलती है सफलता संघर्ष से मिलती है ,कठिन श्रम और संघर्ष का दूसरा पहलु है सफलता और आनंद । जब तक कठिनाई नही आती तब तक कार्य कुशलता और चैतन्यता की परीक्षा नही होती । हम नही जान पाते की की हम क्या कर सकते हैं । मुसीबतों की ज्वाला मैं अपनी बहुत सी कमजोरियां भी जल जाती हैं । हम साहसी और धैर्य वान बन जाते हैं बुद्धि में और कार्य में तीव्रता आ जाती है ,चेतना में उछाल आ जाता है सुप्त शक्तियाँ जागृत हो जाती है । यदि हम इतिहास में देखे तो जितने भी महापुरुष हुए हैं उनके जीवन से कष्टों और कठिनाइयों को निकाल दे तो वे एक साधारण मनुष्य मात्र बन कर रह जायेंगें । राणाप्रताप के जीवन से यदि उनके संघर्ष को निकाल दे तो क्या बचेगा उनको महान बनाये राजा तो उस समय भी बहुत थे कितने राजाओं को कोई नही जानता । उनको महापुरुष बनाने का श्रेय उनकी कठिनाइयों को जाता है ,उनकी वीरता ,उनकी हिम्मत उनको महापुरुष बनाती है । शिवा जी की बहादुरी ,राजा हरिश्चंद्र का सत्य प्रेम ,दधिची की तपस्या एक इतिहास रचती है । सफलता की मंजिल पर पग -पग चल कर ही पहुँचा जा सकता है । लड़ता -सहता ,चोटें खाता ,परिश्रम करता आदमी ही एक दिन सफल होता है । सफल होने के लिए क्रोध ,घुटन ,उबन ,निराशा ,हताशा को त्यागना ही होगा । सफलता पाना एक तपस्या है इसमे अडिग रहना पड़ता है तभी आदमी रक्षित होता है । कठिनाइयाँ सोचने में ,देखने में बड़ी लगती हैं परन्तु जब आप उसे करने या उनसे पार होने का संकल्प कर लेते है तो सफलता मिल जाती है तब वो डर एक भ्रम साबित होता है ।
समय को कीमती धन मानिए । सफलता आपकी मित्र बनेगी
समय को कीमती धन मानिए । सफलता आपकी मित्र बनेगी समय पर अपनी पैनी निगाह रखिये याद रखिये -अवसर को योग्य मनुष्य की तलाश रहती है । कुछ लोग ऐसे ही समय को जाने देते है फ़िर बहाने बनाते हैं । एक अवसर अगर निकल जाय तो निराश और हताश न होकर दूसरे की तलाश में रहना चाहिए । अवसर रोज मिलता है दृढ़ता पूर्वक इसकी तैयारी करो और सफल बनो । अपनी सूझ -बूझ का पूरा उपयोग करो अपनी दृष्टि व्यापक हो तो अवसर का भरपूर लाभ मिलता है । समय पैसे से अधिक कीमती है पैसा अगर चला गया तो आप फ़िर से पा सकते है पर जो समय चला गया तो नही पा सकते । हर एक समय जब भी आप काम करना चाहे महत्व पूर्ण है । इसलिए कोई अवसर न खोये और सफल होने का रास्ता बनाये । कर्मठ व्यक्ती चार दिन के कार्य को दो दिन में भी कर सकते हैं उसी जगह एक आलसी व्यक्ति बड़ी मुश्किल से हाय -हाय करके वही काम करने में ८ दिन भी लगा सकता है । यह काम कल कर लेंगे रोज रोज यह कहना रोग बन जाता है काम को टालने की वेवजह आदत बन जाती मैंने कई ऐसे लोगों को देखा है जो बैठ गए तो दो घंटे से पहले हिल नही सकते उनके लिए सर घुमाना भी एक काम होता है । ऐसे लोग बड़ी तकलीफ देते हैं ख़ुद को तो नही पर अपने आस -पास और घर के लोग इनसे परेशान रहते है और काम करने वाले के लिए ये मजाक के पात्र होते है । ऐसे लोग अपनी लापरवाही के कारण अपना जीवन बरबाद करते हैं और इनको पता भी नही होता । इनके जबाव भी इसी तरह के होते है की -अभी करते है ,अभी आते हैं इनका अभी दो घंटे से कम का नही होता ये काम की गंभीरता को नही समझते हैं अपनी चाल में हाथी की मस्ती कायम रखते हैं । पर अगर सोच ले की यह सब छोड़ना है ख़ुद को बदलना है तो निश्चित ही बदलाव होगा और सफल भी होंगे । आवश्यकता है समय को नियोजित करने की और दृढ़ निश्चय की । एक अनगढ़ पत्थर को एक जानकर उठाता है अपनी कल्पना के अनुरूप उसे काट कर एक आकर देता है वह कला कही जाती है वह आकर बाहर से नही वह तो उस पत्थर में ही था बस उसको संकल्प शक्ति से एक रूप दिया कलाकार ने । इसी प्रकार दृढ़ इक्षा शक्ति रचना करती है । अगर आप शुरू ही न करे तो रचना कैसे होगी मूर्ती बिना परिश्रम किए कैसे बनेगी । पुरुषार्थ को जागृत किया जा सकता है । अतः काम को खिचिये मत ,निष्क्रियता ऐसा दीमक है जो खाता तो है पर दीखता नही । इसलिए कर्मठ बने और सफलता पाये ।
सोच को सार्थक बनाएं
सोच को सार्थक बनाएं जीवन में असफलता का दुःख थोडी देर मना कर पुनः अपने काम को करना चाहिए किसी भ्रम का शिकार भी नही होना चाहिए । भ्रम हमें कठिनाई में दाल देता है । विषय की जानकारी ठीक तरह से होनी चाहिए कार्य की तीव्रता ,निर्णय की तीव्रता और स्वभाव की आक्रामकता हमें असफल बनाती है । इसके विपरीत कार्य करने की सही समझ ,तरीका सफल बना देता है हमें ।
सफल होने के लिए अपने को जाग्रत करना पड़ता है
सफल होने के लिए अपने को जाग्रत करना पड़ता है सफल होने के लिए अपने को जाग्रत करना पड़ता है एक उदहारण दे आपको - एक माँ अपने बच्चे के लिए कुछ भी करना पड़े करती है ,अपने बच्चे की देख भाल में वो अपना ख्याल नही रखती पर इसको लेकर उसके मन में कोई गिला नही रहती वह बड़ी खुशी से इस काम को करती है दिन रात कुछ नही बाधक बनते उसके इस काम में ,जानते हैं क्यों ? क्यों की उसे अपने इस काम में मन लगा होता है उसकी पूर्ण रूचि रहती है इसमे । इसी प्रकार जिस काम में रूचि होगी उसमे सफलता भी मिलेगी ही । तो रूचि पूर्ण काम भी आपको सफल बना देगा । बुनियादी मूल्यों को न छोड़े । मैं फ़िर एक बार लिखती हूँ की १०० बार गिर कर भी न हारे ,जब तक प्राण रहे तब तक न हारे । दृष्टि को लक्ष्य पर केंद्रित करें । जय होगी ,जीत होगी ,सफलता मिलेगी
हेयर स्टाइल ने बनाया फेमस
हेयर स्टाइल ने बनाया फेमस अपने पहनावे, साज संवार, मेकअप व स्टाइल में कोशी आरम्भ से ही अलग रही है. उसके पास मंहगे या डिजाइनर कपडे नहीं होते. अपने रोजाना के कपडों में से ही वह एक स्टाइल निकालती है और इस रूप में उसे तब्दील करके पहनती है कि लगने लगता है कि वह कोई बहुत मंहगे ताम-झामवाले कपडे पहने हुए है. जब वह 12वीं कक्षा में थी, तब मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज के सालाना उत्सव मल्हार में ड्रेस डिजाइन और मॉडलिंग की थी और उसमें अपनी टीम सहित प्रथम आई थी. बावजूद इसके उसे मॉडलिंग आकर्षित नहीं करता. आज भी वह अपने ड्रेस सेंस और बालों, मेकअप को लेकर अलग रूप अपनाती है. उसे जाननेवाले उसके बारे में तरह-तरह की बातें करते हैं, मसलन, वह इंटरनैशनल कैलिबर की लडकी है. ….वह समय के पार जाकर अपना इतिहास खुद रचनेवाली लडकी है….आदि आदि. वोग में आकर उसने यह दिखा दिया है कि अपनी अलग सोच और तरीका आपको एक नया स्वरूप देता है. कोशी अपने तरीके से अपना स्थान बना रही हैं. एक तिमाही के दौरान VOGUE में उपस्थिति हर्षाती है.सितम्बर 2011 के VOGUE में कोशी ब्रह्मात्मज अपने हेयर स्टाइल को लेकर आई. वोग ने Street style: Real hair styles in Bengaluru के तहत बंग्लुरु की कुछ कन्याओं के बालों की यूनिक शैली को खोज निकाला.
फेमस होने के लिए लोग कर रहे हैं ऐसा
फेमस होने के लिए लोग कर रहे हैं ऐसा फेमस होने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते, कोई अपने काम से फेमस है तो कोई नाम से। पिछले कुछ दिनों में लोगों के फेमस होने के तरीके में काफी बदलाव आया है। या यूं कहे कि फेमस होने के लिए लोगों ने पब्लिसिटी स्टंट के तरीके थोड़े से बदल लिए है। अब लोग काम से कम और नाम से ज्यादा फेमस होना चाहते हैं। आपको यकीन नहीं होता तो खुद देखिए इन तस्वीरों को और सोचिए इनका नाम ज्यादा फेमस है या काम।
फेमस होने के लिए खड़े किए जाते हैं विवाद
फेमस होने के लिए खड़े किए जाते हैं विवाद बॉलीवुड में बड़े बजट की फिल्मों को लेकर पैदा होने वाले विवादों के बारे में अभिनेता अजय देवगन का कहना है कि अज्ञात लोग प्रसिद्ध होने के लिए विवाद खड़े करते हैं। हिन्दी फिल्म उद्योग में विवादों के चलन के बारे में पूछे जाने पर देवगन ने कहा, अधिकतर मामलों में जहां कोई व्यक्ति किसी खास फिल्म के बारे में मामला दायर करता है, आप पाएंगे कि उससे पहले उस व्यक्ति का नाम किसी ने भी सुना नहीं होता है। वह विवाद खड़ा करता है और मशहूर हो जाता है। ‘सिंघम रिटर्न्स’ में सुपरकॉप की भूमिका निभाने वाले अभिनेता ने कहा, विवाद इसलिए भी पैदा होते हैं क्योंकि कुछ लोग विवाद पैदा करना चाहते हैं। लेकिन कुछ लोग वास्तविक मुद्दे भी उठाते हैं। फिल्म ‘सिंघम रिटर्न्स’ भी उस समय छोटे से विवाद में फंस गई थी जब हिन्दू संगठन ‘हिन्दू जन जागृति समिति’ ने सेंसर बोर्ड से यह कहकर इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी कि यह हिन्दू संतों को गलत परिप्रेक्ष्य में दिखाती है। अभिनेता ने कहा, वह अब सुलझ गया है क्योंकि फिल्म में कोई विवाद नहीं है। उन्होंने यह कहकर मीडिया पर भी जिम्मेदारी डाली कि इसे समझना और इसे नजरअंदाज करना तथा एक जिम्मेदार मीडिया बनना मीडिया का काम है।
Twitter पर फेमस होने के लिए
Twitter पर फेमस होने के लिए नई दिल्ली: दिल्ली के इंद्रप्रस्थ इंस्टिट्यूट ऑफ इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी की परिधि जैन और पोन्नुरंगम कुमारगुरु ने 87 लाख ट्विटर यूजर्स की ऐक्टिविटीज की जांच की। इस जांच में पाया गया कि कुछ यूजर्स इवेंट के हिसाब से अपना हैंडल यानिकी ट्विटर पर नाम बदलते हैं, जबकि कुछ यूजर्स बोरियत से बचने के लिए ऐसा करते हैं। स्टडी के मुताबिक, ऐसे यूजर्स माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर ज्यादा पॉप्युलर होते हैं और अधिक सक्रियता से दूसरे यूजर्स को फॉलो करते हैं। वही एक शख्स ने बताया कि वह कई बार अपना मूड बताने के लिए भी अपना ट्विटर नेम बदल लेता है। तो कई लोगों ने बताया कि यूजर नेम बड़ा होने के कारण वह उसे बदलकर छोटा कर लेते है। बता दें कि 2009 से लाखों यूजर्स ट्विटर से जुड़ रहे है। इनमें से बहुत ही कम यूजर्स हैं जो पुराने यूजर्सनेम का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, ट्विटर ने यूजर्स नेम बदलने को लेकर कोई लिमेट तय नहीं की है, लेकिन फेसबुक और अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने अपना यूजर्सनेम बदलने की संख्या तय कर रखी है।
कैंपस में फेमस होने के तरीके
कैंपस में फेमस होने के तरीके कॉलेज में एडमिशन स्टूडेंट्स की लाइफ का सबसे यादगार लम्हा होता है। कॉलेज में हर स्टूडेंट खुद को खास दिखाने की कोशिश करता है। वह कॉलेज में अपनी सबसे अलग पहचान बनाने और कॉलेज में सबसे फेमस स्टूडेंट बन कर अपना इंप्रेशन जमाना चाहता है। हम आपको कुछ ऐसे तरीके बता रहे हैं जिनसे आप कॉलेज में फेमस बन सकते हैं। पढ़िए सतीश पासवान की यह रिपोर्ट फर्स्ट डे को बनाएं खास: पहले दिन सीनियर्स को अपना इंट्रोडक्शन अच्छे से दें। इंट्रो में क्रिएटिविटी दिखनी चाहिए लेकिन अपनी ज्यादा बढ़ाई न करें। रॉक स्टार बनो: अगर आपको पहले से ही गिटार या कोई दूसरा इंस्ट्रूमेंट बजाना आता है तो आपकी पॉपुलैरिटी तय है। इसके अलावा अगर आप अच्छा गाना गा सकते हैं तो भी आप कॉलेज में हिट हो सकते हैं। स्टाइल में रहने का: अपने बालों को ऐसा स्टाइल दें जो आप पर सूट करता हो। बिल्कुल हटकर स्टाइल रखकर भी अलग दिख सकते हैं। कपड़े चूज करने में भी फैशन का ध्यान रखना होगा। पढ़ाई में अव्वल: कॉलेज में सब पढ़ने के लिए ही आते हैं। अगर आप किसी सब्जेक्ट में अच्छे हैं तो यह आपकी यूएसपी बन सकता है। दूसरे स्टूडेंट्स आपकी हेल्प लेने के लिए आपके आगे पीछे घूमेंगे।
फेमस होने के लिए लोग क्या – क्या नहीं करते ?
फेमस होने के लिए लोग क्या – क्या नहीं करते ? फेमस होने के लिए लोग क्या – क्या नहीं करते ? तथाकथित राजनेताओं पर वोट बटोरने का ऐसा बुखार चढ़ जाता है कि उन्हें सारी हदें पार करने से भी कोई गुरेज नहीं होता ! परिणामतः वो हल्की राजनीति करने पर उतर आते है ! जान बूझकर कश्मीर जैसे अत्यंत संवेदनशील मुद्दों पर मूफट की तरह अपना मुंह खोल ही देते है ! वर्तमान वाकया पकिस्तान के तथाकथित नेता इमरान खान जी का है ! भारतीय अख़बारों में छपी खबर के अनुसार क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान ने पाकिस्तान में अपनी राजनीति चमकाने के लिए कश्मीर मुद्दा उठाया है ! लाहौर में एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के मुखिया इमरान खान ने कश्मीर से भारतीय सेना के हटाए जाने की मांग की है ! लाहौर में रैली को संबोधित करते हुए इमरान खान ने कहा, ‘मैं हिंदुस्तान को बता देना चाहता हूं कि कश्मीर के लोगों के बीच सात लाख सैनिक तैनात करके तुम्हें कुछ हासिल नहीं होगा। इतिहास गवाह है कि कोई भी सेना किसी भी देश की समस्या का समाधान नहीं कर सकी है।’ ज्ञातव्य है कि पाकिस्तान में 2013 में आम चुनाव होने है ! लाहौर में हुई इस रैली में करीब एक लाख लोग शामिल हुए ! पिछले कुछ महीनों से इमरान खान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भारत के खिलाफ भड़काऊ ऐसे भाषण दे रहे हैं! कश्मीरी लोगों के अधिकारों की वकालत करते हुए इमरान खान कहते है कि भारत को घाटी से सेना को वापस बुला लेना चाहिए और कश्मीर के लोगों को उनके अधिकार देने चाहिए। इमरान खान ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी कश्मीरी लोगों के साथ है और हमेशा उनकी आवाज उठाती रहेगी। लाख टके का अब सवाल यह है कि इमरान खान जैसे तथाकथित नेताओं में भारत के खिलाफ बोलने की इतनी हिम्मत कैसे आ जाती है ? कही जम्मू – कश्मीर के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री उमर अब्दुल्ला के द्वारा दिए गए बयानों से तो नहीं आ जाती ? जिन्होंने कश्मीर से AFSPA (Armed Force Special Power Act ) हटाने की बात की थी ! बयानों के इस दौर में पहले प्रशांत भूषण जैसे फेमस वकील ने भी एक विवादस्पद बयान दिया था ! ज्ञातव्य है कि अभी कुछ दिन पहले ही प्रशांत भूषण जी ने कश्मीर मुद्दे पर जनमत संग्रह की बात कहकर अपनी व्यक्तिगत राय के द्वारा भारत की अखंडता के साथ खिलवाड़ करने का दुस्साहस किया था !
प्रतिष्ठा हर किसी को नहीं मिलती
प्रतिष्ठा हर किसी को नहीं मिलती प्रतिष्ठा हर किसी को नहीं मिलती ना ही कोई यूँ ही जगप्रसिद्ध होता है। कई युवा अपनी प्रतिष्ठा को बनाने में सालों-साल गुजार देते है तो कुछ ऐसे भी होते है जिन्हें थोड़े सी कोशिश से फेम मिल जाती है। कोई जीते जी प्रतिष्ठित बन जाता है तो कोई अपने मरने के बाद प्रसिद्ध होता है। प्रतिष्ठा या फेम बिना कुछ किए-धरे नहीं मिलती बल्कि इसके लिए वैसे कर्म भी करने पड़ते हैं। अच्छे कर्म जो प्रतिष्ठा दिलाएँ , यह हमारी होरोस्कोप के प्लेनेट से डिसाइड होता है। प्रतिष्ठा के लिए हमें होरोस्कोप का 9,8 , सेंटर, 4 , 10, 5 और 7 वें घर को देखना होगा।
भाव 9
भाव 9 भाव 9 का स्वामी गुरु हो तो ऐसे युवा प्रतिष्ठा पाते है। गुरु उच्च का, स्वराशि या मित्र राशि में होना चाहिए। भाव 9 का मालिक सुख भाव 5 में स्वराशि का हो तो ऐसे जातक अपने क्षेत्र में प्रसिद्ध होते ही है।
फेमस होने के लिए कई तरह के पैंतरे अजमा रहे है।
फेमस होने के लिए कई तरह के पैंतरे अजमा रहे है। आज के समय में लोग फेमस होने के लिए कई तरह के पैंतरे अजमा रहे है। ऐेसे ही एक महिला द्वारा टीवी शो में आने का भूत एस कदर सवार हुआ कि जानबूझकर वह अपने अजन्मे बच्चे को ही मारना चाहती है। पेशे से एक मॉडल जोसी कनिंघम नाम की महिला को एक अमेरिकन टीवी शो में आने का मौका मिला है। जोजी हमेशा से एक सेलिब्रिटी की जिंदगी बिताना चाहती है। टीवी शो का हिस्सा बनने के लिए जोजी का कहना है कि उसे अच्छा दिखना जरूरी है। लेकिन प्रेग्नेंट होने की वजह से वह मोटी हो गई है और आने वाले दिनों में और भी ज्यादा मोटी हो जाएगी। जोजी का कहना है कि उसे टीवी पर आने का अवसर मिलना उसके लिए काफी बड़ी उपलब्धि है और पॉपुलर होने से सिर्फ एक कदम पीछे नहीं रहना चाहती है। अपना बच्चा गिरा देने का मन बना चुकी 23 साल की जोजी अपने करियर में बच्चे का पेट में आना एक आफत मानती है। जोजी का कहना है कि अबॉरशन करवाने से उसका करियर एक नई ऊंचाई पर चढ़ेगा और वह नई गाडियों में घूमेगी व पार्टीज में जाएगी। जोजी अपने 18 हफ्ते के बच्चे को जल्द ही अबॉर्ट करवा देगी। उसके इस फैसले को सुनकर कई लोगों ने उसे शो से हटाने की गुजारिश की है।
आइटम सांग तो फेमस होने का जरिया
आइटम सांग तो फेमस होने का जरिया आइटम सांग सिर्फ आप को फेमस कर सकते हैं. ये सिर्फ लाइमलाइट में आने का जरिया है, लेकिन सिंगर का वर्सेटाइल होना जरूरी है, क्योंकि कॉम्पटीशन बढ़ गया है.
लग्नेश यानी सेंटर का मालिक
लग्नेश यानी सेंटर का मालिक लग्नेश यानी सेंटर का मालिक का मातृभाव 4 या सुखभाव 5 में हो तो उसको प्रसिद्ध बनाएगा। नवम भाव में शनि-चंद्र, गुरु-चंद्र का होना उस जातक को प्रतिष्ठावान बनाएगा। नवमेश का लग्न में लग्नेश के साथ होना या लग्न में भाग्येश के साथ शनि-चंद्र का होना उस जातक को संत बनाकर प्रसिद्ध बनाऐगा। भाव 10 में शुभ गुरु हो तो ऐसे जातक अपने कर्मो द्वारा जगप्रसिद्ध होते है। भाव 5 में शुभ ग्रहों का होना उस जातक को अपनी योग्यता द्वारा प्रसिद्ध बनाएगा।
इन से संबंधित ग्रह
इन से संबंधित ग्रह संबंधित ग्रह, इन पर पड़ने वाली दृष्टियाँ, इनमें युतियाँ या इन भावों के आपसी संबंध, ग्रहों का मार्गी, उदय, युवा होना आवश्यक होता है। सेंटर हाऊस स्वयं के विचारों,स्वस्थ शरीर और पर्सनेलिटी को बताता है। भाव 9, धर्म, यश, संत प्रकृति, धार्मिक कार्य या अनुष्ठान आदि के बारे में बताता है। भाव 8 गुप्त विद्या व यश को बताता है। भाव 4 जनता से संबंधित मामलों की जानकारी देता है। जनता से संबंध अच्छे होना ही प्रतिष्ठा की निशानी है। भाव 10 कर्म का है। युवा अपने जीवन काल में कैसे कार्य करेगा कि फेम मिल सकें, यह इस घर से जाना जाता है। 5 विद्या का घर है, विद्या अच्छी हो या पाँचवें घर के मालिक की शुभ स्थिति हो तो प्रतिष्ठा दिलाने में सहायक होगी। भाव 7 स्त्री से संबंधित है यदि इस भाव की स्थिति या इस भाव का मालिक कमजोर है तो प्रतिष्ठा में कलंक भी लग सकता है।
सुख भाव 5
सुख भाव 5 सुख भाव 5 का स्वामी भाग्य स्थान 9 में हो या भाग्य स्थान का मालिक सुख भाव में हो तो ऐसे जातक विश्वविख्यात होते है।
तैयार हो जाइए और भी फेमस होने के लिए
तैयार हो जाइए और भी फेमस होने के लिए फेसबुक पर अगर आप और भी फेमस होना चाहते है तो तैयार हो जाइए क्योंकि आपके लिए अब आ गया है ‘प्रमोटेड पोस्ट्स’। क्योंकि अब फेसबुक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने वाले बस कुछ ही पैसों में इस पर अपना प्रचार भी कर सकते हैं। हालांकि यह सेवा अभी सिर्फ अमेरिकी प्रयोगकर्ताओं के लिए ही उपलब्ध है। अगर आप चाहते हैं कि आपके दोस्त आपकी किसी निजी घोषणा को जरूर देखें तो बस एक छोटे से शुल्क का भुगतान करके आप इस साइट पर अपनी मौजूदगी बढ़ा सकते हैं। इसके लिए कीमत तो अभी तय नहीं हुई है लेकिन फेसबुक ने कल अपना नया पेड प्रोडक्ट ‘प्रमोटेड पोस्ट्स’ जारी कर दिया है। इसके जरिए फेसबुक कुछ ज्यादा पैसा कमा सकेगा।
प्रोफाइल के छोटे-छोटे सच
प्रोफाइल के छोटे-छोटे सच लिंक्ड-इन पर हेडलाइन या अपनी समरी भरते समय कुछ लोग अक्सर उसे अधूरा छोड़ देते हैं या भरते ही नहीं। अगर आप हेडलाइन वाले सेक्शन को अधूरा छोड़ देंगे तो वह आपके ‘वर्क प्रोफाइल सेक्शन’ में पिछली नौकरी की जानकारी की पहली लाइन को उठाकर डिफॉल्ट हेडलाइन बना देता है। लेकिन आप अगर थोड़ी-सी मेहनत करें और अपने काम के नेचर या अपनी महारत को समझाते हुए अपना हेडिंग बनाएं, तो उसका अच्छा असर पड़ेगा। यह आपको कॅरिअर के नए मोड़ की तरफ भी ले जा सकता है। पुराने कार्यगत अनुभव और शैक्षणिक योग्यता को भरने के बाद ‘समरी’ का सेक्शन आता है। लोग अक्सर इसे भी गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन इसमें आप अपने स्किल्स, यूएसपी या अनुभव के बारे में दो-चार लाइनें सही तरीके से लिखें, तो बाकी लोग आपके बारे में बेहतर ढंग से जानकारी हासिल कर पाएंगे।
तारीफ करें, तारीफ पाएं
तारीफ करें, तारीफ पाएं लिंक्ड-इन में टेस्टिमोनियल का भी एक फीचर है। यानी कभी किसी के साथ प्रोफेशनल ढंग से जुड़े हैं या साथ काम किया है, तो उसकी तारीफ में कुछ लाइनें लिख सकते हैं। प्रोफाइल में टेस्टिमोनियल अहम भूमिका निभाते हैं। इनसे पता चलता है कि आप कैसे टीम मेंबर है, लोग आपके काम को सराहते हैं या नहीं? लेकिन टेस्टिमोनियल लिखने के लिए लोगों से गुजारिश न करें। बेहतर तरीका यह है कि जिन लोगों से आप प्रोफेशनली जुड़े रहे हों, उनकी तारीफ में खुद टेस्टिमोनियल लिखें। ऐसे में इस बात की बहुत संभावना है कि सामने वाला भी आपके बारे में कुछ लिखे। प्रोफाइल में जितने ज्यादा और ईमानदार टेस्टिमोनियल होंगे, आपको उतना फायदा होगा।
क्या है लिंक्ड-इन
क्या है लिंक्ड-इन लिंक्ड-इन को प्रोफेशनल सोशल नेटवर्किग साइट के तौर पर 2003 में लांच किया गया था। दुनिया के 200 देशों के 15 करोड़ से ज्यादा लोग इससे जुड़े हैं और इस फील्ड में यह नंबर वन साइट है। इसके सबसे ज्यादा यूजर्स अमेरिका में हैं। भारत की गिनती सबसे तेजी से बढ़ते लिंक्ड-इन मेंबर वाले देशों में होती है। लिंक्ड-इन पर जाकर आप अपनी प्रोफाइल बना सकते हैं। इसमें कॅरिअर और शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी डालनी होती है। इसमें आप अपने प्रोफेशन का ग्रुप बनाकर या पहले से बने ग्रुप से जुड़कर अपनी फील्ड के लोगों से जुड़ सकते हैं। विभिन्न कंपनियां अब नौकरी पर रखते समय लोगों के लिंक्ड-इन प्रोफाइल पर भी नजर डालती हैं, क्योंकि इससे उनके नेटवर्क, काम के अनुभव और दोस्तों के बारे में पता चलता है। ऐसे में बेहद जरूरी है कि लिंक्ड-इन पर आपकी प्रोफाइल दिखावटी ना हो, लेकिन वह ऐसी हो, जो आपकी प्रभावी छवि पेश कर सके।
ग्रुप बनाएं और डिस्कस करें
ग्रुप बनाएं और डिस्कस करें लिंक्ड-इन पर आप अपने क्षेत्र से जुड़ा कोई ग्रुप बना सकते हैं या उससे संबंधित किसी पुराने ग्रुप को ज्वाइन कर सकते हैं। लिंक्ड-इन के सभी फीचर्स में यह सबसे काम का है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह के ग्रुप आपको अपनी फील्ड से जोड़कर रखते हैं। आप लोगों की नजर में आते हैं। साथ ही आपको अपनी फील्ड के नए ट्रेंड्स के बारे में भी जानकारी मिलती रहती है।
ट्विटर से जुड़ें, लेकिन
ट्विटर से जुड़ें, लेकिन लिंक्ड-इन प्रोफाइल पर आप अपना ट्विटर अकाउंट भी जोड़ सकते हैं। यह आपसे जुड़े लोगों को बताने का अच्छा तरीका है कि आप क्या सोचते हैं। लेकिन ट्विटर अकाउंट को यहां कनेक्ट करने से पहले सावधानी बरतें। आप ट्विटर पर अगर ऐसे विचार जताते हैं, जो आपके प्रोफेशनल रूप से मेल नहीं खाते, तो उसे कनेक्ट न करें। वैसे लिंक्ड-इन आपको ऑप्शन देता है कि आपकी वही टवीट्स यहां आएं, जिनमें प्तद्बठ्ठ लिखा हो। इससे आप खास तरह के टवीट्स ही भेज सकते हैं।
झूठ बोलने की वजह से काफी मसहूर
झूठ बोलने की वजह से काफी मसहूर एक आदमी झूठ बोलने की वजह से काफी मसहूर हो गया .. एक दिन वह किसी दूसरे शहर मे चला गया ... एक अस्सी साल की बूडी औरत को पता चल गया तो डरती हुई आयी और बोली :- बेटा तुम ही दुनिया के सबसे झूठे व्याक्ति हो ना ..... . आदमी बोला :- लोगो की बात को दफा करो , ..... . . मै तो आपको देखकर हैरान रह गया कि इस उम्र मे ये हुस्न ये रंग और ये दिलकसी..... . बूढी औरत :- (शरमाती हुई ) या अल्लाह लोग भी कितने जालिम है अच्छे भले सच्चे इन्सान को झूठा कहते है
क्यों जरूरी है सही पॉस्चर
क्यों जरूरी है सही पॉस्चर सही पॉस्चर वही है, जिसमें इस अंदाज से खड़ा हुआ जाए, चला जाए और बैठा जाए कि शरीर की मांसपेशियों और लिगमेंट्स पर दबाव न पड़े। यह कहना है पुष्पांजलि मेडिकल सेंटर की फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. नेहा सभरवाल का। वह कहती हैं, ‘सही पॉस्चर न सिर्फ आपके स्वास्थ्य के लिए, बल्कि आपके लुक के लिए भी बेहतर है। इससे शरीर की मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं और कमर व गर्दन में भी दर्द नहीं होता। सांस लेने में भी आसानी होती है। जिन लोगों का पॉस्चर सही होता है, वे ज्यादा युवा नजर आते हैं।’ जिन लोगों का पॉस्चर सही नहीं होता, वह न सिर्फ उम्र से बड़े नजर आने लगते हैं, बल्कि महसूस भी करने लगते हैं। उनमें आत्मविश्वास की कमी भी नजर आती है। सही पॉस्चर शरीर के बेहतर संतुलन के लिए भी जरूरी है।
क्या है पॉस्चर परफेक्ट
क्या है पॉस्चर परफेक्ट अधिकतर लोगों को यही पता नहीं होता कि सही पॉस्चर क्या होता है। इसके लिए जरूरी है कि विभिन्न स्थितियों में शरीर के सही पॉस्चर को जानें और उसे अपनी आदत में शामिल करें।
बैठने की स्थिति
बैठने की स्थिति हमेशा कमर सीधी और कंधे पीछे की ओर करके बैठें। शरीर का भार दोनों हिप्स पर बराबर हो। हर 30 मिनट के बाद अपनी पोजीशन बदलें। अगर आप कुर्सी पर बैठे हों तो दोनों पैरों को फर्श पर फैला लें। सोते समय भी रखें पॉस्चर का ख्याल हमेशा कमर के बल सोएं। पेट के बल सोने से गर्दन और कमर का पॉस्चर खराब हो सकता है। तकिया सिर के नीचे हो, कंधे के नीचे नहीं। ज्यादा नर्म गद्दे पर न सोएं। इससे रीढ़ की हड्डी में तकलीफ हो सकती है।
कंप्यूटर पर काम करते समय
कंप्यूटर पर काम करते समय द अपोलो क्लिनिक की एम.एस.(ऑर्थो.) डॉ. अपर्णा अग्निहोत्री कहती हैं, ‘आज कंप्यूटर या लैपटॉप हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। कंप्यूटर के सामने बैठते समय हमारी पीठ सीधी हो, खासकर रीढ़ की हड्डी। कंप्यूटर की स्क्रीन आंखों से 15 डिग्री नीचे की तरफ होनी चाहिए। स्क्रीन और आंखों के बीच लगभग 2 फीट की दूरी होनी चाहिए।
टीवी देखते समय
टीवी देखते समय आजकल घर में हर समय टीवी चलता रहता है। फ्लैट में कमरे छोटे हो गए हैं, इसलिए टीवी देखते समय दो बातों का विशेष ध्यान रखें। टीवी हमेशा पर्याप्त रोशनी में देखें, अंधेरे में नहीं। टीवी आंखों के लेवल से थोड़ा ऊपर रखा हो तो बेहतर रहेगा।
चलते समय
चलते समय हम अपनी जिंदगी में पता नहीं कितने मीलों चलते हैं, लेकिन शायद ही कभी इस बात का ख्याल रखते हैं कि चलते समय हमारा पॉस्चर कैसा होता है। चलने का सबसे सही पॉस्चर है, कंधों को सीधा रखें। सिर कंधों के ऊपर हो, रीढ़ की हड्डी एकदम सीधी। चलते समय सीधे रहें, घुटनों की तरफ से मुड़े हुए नहीं।
दौड़ते समय
दौड़ते समय दौड़ते समय भी इस बात का ध्यान रखें कि आपका पॉस्चर एकदम सही हो। गलत पॉस्चर से मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है। दौड़ते समय पीठ एकदम सीधी होनी चाहिए। हाथ खुले न हों, दोनों हाथों की मुट्ठियां बंधी हुई हों और दौड़ते समय दोनों हाथों की पोजीशन एक जैसी होनी चाहिए।
पढ़ते समय
पढ़ते समय हमेशा पर्याप्त रोशनी में पढ़ें। इस बात का भी ख्याल रखें कि रोशनी आंखों पर नहीं, बल्कि किताब पर पड़नी चाहिए। पढ़ते समय सिर को किताब में न गाड़ें। इससे गर्दन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। पढ़ते समय कमर हमेशा सीधी रखें। झुककर पढ़ने से कमर और गर्दन में दर्द होने की आशंका काफी बढ़ जाती है।
उपचार
उपचार आदतें आसानी से नहीं छूटतीं, खासकर बुरी आदतें। सबसे पहले हम उपचार के लिए आए व्यक्ति को सही पॉस्चर की जानकारी देते हैं। गलत पॉस्चर से शरीर पर पड़े प्रभावों को दूर करने के लिए पहले स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करवाते हैं, उन्हें सही पॉस्चर की आदत डलवाते हैं, फिर मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करवाते हैं।
गलत पॉस्चर के दुष्परिणाम
गलत पॉस्चर के दुष्परिणाम कमर के निचले हिस्से और गर्दन में दर्द। कूबड़ निकल आना। व्यक्ति उम्र से बड़ा दिखने लगता है। मासपेशियां या तो खिंच जाती हैं या छोटी हो जाती हैं। वह लंबे समय तक अपना सामान्य काम नहीं कर पातीं। शरीर को लगातार गलत पॉस्चर में रखने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्र कम हो जाती है। रीढ़ की हड्डी का अलाइनमेंट बिगड़ जाता है। तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। गलत पॉस्चर से जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे जोड़ों में दर्द हो जाता है, जो आगे चलकर गठिया रोग बन जाता है।
परिचय
परिचय ऑफिस में ढेर सारे काम के बाद रात में देर तक काम के बाद घर जाकर घंटों तक टीवी देखने या कंप्यूटर पर लगे रहने की आदत, कभी नींद ही नहीं आती है और कभी वीकेंड पर देर तक सोते ही रह जातें हैं। नींद का आपके रुटीन के साथ जहां बैलेंस गड़बड़ाया, वहीं आपकी सेहत, सफलता और विकास पर ब्रेक लग गया। नींद से जुड़ी आपकी गलत आदते आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक तो हैं ही, साथ ही आपकी पर्सेनालिटी और कार्यक्षमता पर भी इनका गलत असर पड़ता है।
सोने का तरीका भी समझें
सोने का तरीका भी समझें सेहतमंद जीवन के लिए सिर्फ भरपूर नींद ही जरूरी नहीं है बल्कि आपके सोने का पैटर्न क्या है, इसका भी महत्व है। यानी आप रोज रात में कितने बजे सोते हैं और सुबह कितने बजे उठते हैं, इसका प्रभाव भी आपकी सेहत और काम करने की क्षमता पर पड़ता है। कुछ लोग हफ्ते भर कम सोते हैं लेकिन वीकेंड पर देर तक सोते हैं। सोने का यह तरीका सेहत के लिए नुकसानदायक है। सोने के मामले में रुटीन पर बने रहना बेहज दरूरी है।
कितने घंटे जरूरी है नींद
कितने घंटे जरूरी है नींद सामान्य व्यक्ति के लिए कितने घंटे की नींद जरूरी है इस पर कई तरह के शोध हो चुके हैं। चूंकि अलग-अलग व्यक्ति की नींद की जरूरतें कम या ज्यादा हो सकती हैं इसलिए कम से कम 6 घंटे और ज्यादा से ज्यादा 9 घंटे तक की नींद सही मानी जाती है।
हो सकती हैं ये समस्याएं
हो सकती हैं ये समस्याएं नींद कम लेते हैं या फिर जरूरत से ज्यादा, नींद का बैलेंस गड़बड़ाया तो इसके कई नुकसान हो सकते हैं। कम नींद लेने से अक्सर लोगों का ध्यान किसी एक जगह नहीं टिक पाता है जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। वहीं आवश्यकता से अधिक नींद से बेचैनी, सिरदर्द, आलस शरीर में घर कर जाता है जो आपके काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
इन आदतों को बदलें
इन आदतों को बदलें नींद का टाइमटेबल सही रहे और आपकी कार्यक्षमता पर इसका गलत असर न पड़े इसके लिए जरूरी है कि आप अपने रुटीन में इन सावधानियों को तरजीह दें। सोने और टीवी देखने के बीच में 45 मिनट का गैप रखें। बहुत देर तक टीवी देखने या कंप्यूटर पर काम करने की आदत पर नियंत्रण करें। सोने से पहले किताब पढ़ने या संगीत सुनने की आदत डालें। चाय-कॉफी का सेवन कम करें। एल्कोहल से दूरी रखें। सोने से पहले बैलेंस डाइट लें। आपकी जीवनशैली में ये बदलाव यकीनन आपकी नींद संतुलन ठीक रखेंगे और आपको कार्यक्षेत्र में सफल बनाने में मदद करेंगे।
परिचय
परिचय शर्मीलापन कोई समस्या नहीं. यह किसी भी नई परिस्थिति या नये व्यक्ति से मिलने से पहले खुद को तैयार करने के लिए बिल्कुल ठीक माना जाता है. लेकिन अकसर शर्मीलापन कुछ लोगों की सहजता या अपने आसपास का माहौल जैसा वे चाहते हैं, उसमें अड़चन पैदा करता है. कुछ लोग खुद को कम शर्मीला महसूस कराना चाहते हैं. इसी वजह से, वे ज्यादा से ज्यादा मेल-जोल बढ़ाने और लोगों के आसपास नजर आते हैं.
थोड़े से शुरुआत
थोड़े से शुरुआत कम लोगों से शुरुआत करो, जिन्हें तुम जानते हो. सामाजिक व्यवहार जैसे आंखें मिलाना, आत्मविश्वास से भरा बॉडी इमेज, छोटी-छोटी बातचीत, प्रश्न पूछना और ऐसे लोगों को आमंत्रित करना जिनके साथ तुम सबसे ज्यादा सहज महसूस करते हो. साथ ही, मुस्कुराना भी सीखो. इस तरह से अपना आत्मविश्वास बढ़ाओ और अपने नये दोस्तों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार करने का प्रयास करो.
अभ्यास करो
अभ्यास करो कोई बात कहने से पहले अभ्यास करना भी बेहतर है. जब तुम किसी बात कहने की कोशिश करने के लिए तैयार होगे तो हो सकता है, तुम उसे अपने शर्मीलेपन की वजह से छोड़ दो, जैसे कोई फोन कॉल या कोई बातचीत, तुम क्या कहना चाहते हो इसे पहले से ही लिख लो. तेज-तेज बोलकर अभ्यास भी कर सकते हो, चाहो तो शीशे के सामने खड़े होकर भी अभ्यास कर सकते हो. इस बात की फिक्र बिल्कुल मत करो कि वह वैसा नहीं हो पा रहा है जैसा कि तुम अभ्यास कर रहे हो या फिर ज्यादा अच्छा नहीं हो पा रहा है. सबसे खास बात यह है कि तुम आत्मविश्वास बनाए रखो. जब अगली बार तुम अभ्यास करोगे तो तुम खुद को पहले से ज्यादा बेहतर पाओगे
अवसर दो
अवसर दो ऐसी एक्टिविटीज वाले समूह में शामिल हो, जिसमें तुम्हारी दिलचस्पी वाले लोग हों. इस जगह नये लोगों के बीच तुम खुद को मेलजोल बढ़ाने का एक मौका दो और उन लोगों को धीरे-धीरे जानने की कोशिश करो. जो लोग शर्मीले होते हैं अकसर असफलता या फिर लोग उन्हें जज करेंगे जिनकी तुम्हें फिक्र रहती है. इस तरह की फिक्र और अनुभव के बावजूद तुम्हें प्रयास करते रहना चाहिए. खुद को अपना बेस्ट फ्रेंड मानकर व्यवहार करो. असफलता सोचने की बजाय खुद को प्रोत्साहित करने का प्रयास करो. सबसे अहम बात यह कि खुद के बारे में सोचो
बातचीत करो
बातचीत करो बातचीत की शुरुआत को पहले ही सोच लो. अकसर किसी नये व्यक्ति के साथ बातचीत शुरू करने से पहले यही सोचना पड़ता है कि शुरुआत कैसे की जाए. शुरू करने वाली बातें पहले सोच लो जैसे खुद का परिचय देना, तारीफ करना या फिर कोई प्रश्न पूछना. बातचीत शुरू करने के बाद किसी बात का जवाब देने के लिए खुद को तैयार रखो, ऐसा करने से किसी से बातचीत करना ज्यादा आसान हो जाएगा.
नीलोफर
नीलोफर ० कौन नहीं चाहता आकर्षण का केंद्र बनना? ० कौन नहीं चाहता कि कोई उससे बार-बार पूछे कि आपकी खूबसूरती का राज क्या है? ० कौन नहीं चाहता दूसरों से बेहतर बनना? यह सब हमारी चाहत है। हर वक्त दूसरों से बेहतर होना चाहते हैं, बेहतर दिखना चाहते हैं। स्मार्टनेस आत्मविश्वास बढ़ाने का आधार मानी जाती है। यह सच है कि जो दिखने में स्मार्ट होता है या स्मार्ट बना रहता है वह बड़े से बड़ा और विख्यात लोगों के साथ भी बेझिझक बात करता है। यदि आप भी चाहती हैं कि आपमें ऐसा अद्वितीय आत्मविश्वास हो तो जरूरी है कि अपने व्यक्तित्व में सुधार करें। यहां सवाल उठता है कैसे? व्यक्तित्व में सुधार का अर्थ है कि खुद को पूरी तरह बदल डालें। न सिर्फ बातों में स्मार्ट बनें बल्कि आपकी शारीरिक खूबसूरती भी दूसरों को चौंका देने वाली होनी चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि स्मार्ट दिखने के लिए नियमित एक्सरसाइज करते रहना चाहिए। हालांकि एक्सरसाइज बहुत जरूरी है। लेकिन यह न भूलें कि सिर्फ एक्सरसाइज आपके शरीर को आकर्षक नहीं बनाता है। आपके चेहरे को आकर्षक बनाने के लिए आपको अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करने अनिवार्य हैं। ज्यादा परेशान न हों। नीचे दिये जा रहे कुछ टिप्स आजमाएं और खुद को निखारें।
नियमित चेहरे को स्क्रब करते रहें
नियमित चेहरे को स्क्रब करते रहें हफ्ते में एक या दो बार विशेष स्क्रबर से चेहरे को स्क्रब करें। ऐसा नहाने के दौरान भी किया जा सकता है। भीगे कपड़े से भी यह किया जा सकता है। चेहरे पर होशियारी से स्क्रब करें।
शॉवर से शुरुआत करें
शॉवर से शुरुआत करें आप सोचेंगी कि नहाना? वो तो हम रोज करते हैं। मगर जरा रुकिये। सिर्फ नहाना जरू री नहीं है बल्कि सही ढंग से नहाना जरूरी है। नियमित रूप से कम से कम 10 मिनट तक शॉवर के नीचे खड़े रहें। मगर ध्यान रखें कि पानी ठंडा नहीं गुनगुना होना चाहिए। अकसर देखा जाता है कि लोग गुनगुने पानी की बजाय गर्म पानी का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन आप ऐसा न करें। इससे त्वचा रूखी हो जाती है।
पीते रहें पानी
पीते रहें पानी बेहतर स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। यही फंडा हमारी त्वचा को खूबसूरत बनाने में भी लागू होता है। शरीर में पानी की भरपूर मौजूदगी से चेहरा दमकता हुआ नजर आएगा। विशेषकर एक्सरसाइज के दौरान पानी पीते रहना चाहिए। सबको हर रोज कम से कम 2 लीटर पानी पीना चाहिए।
पर्याप्त नींद लें
पर्याप्त नींद लें हमारी आज की व्यस्त जीवनशैली में हम सब कुछ करते हैं पर सोना भूल जाते हैं। रात को घंटों बैठकर काम करते हैं और सुबह हमार चेहरा उतना ही थका हुआ महसूस होता है। ऐसे में भला चेहरा दमकता हुआ कैसे प्रतीत हो सकता है? बेहतर है अपनी नींद के वक्त में कटौती न करें। रात का वक्त ऐसा वक्त होता है जब हमारी त्वचा अपने आप रीन्यू होती है। जब हम पर्याप्त नहीं सोते हैं तो हमारी आंखों के नीचे काले घेरे बढ़ जाते हैं जिसके चलते हमारी खूबसूरती में दाग लग जाता है। यदि आप नियमित और पर्याप्त सोएंगी तो ऐसे घेरे नहीं होंगे। हर दिन 7 से 8 घंटे की नींद जरूर लें।
दवाइयों का सेवन न करें
दवाइयों का सेवन न करें आजकल हम इतने ज्यादा दवाइयों पर आश्रित हो चुके हैं कि काले घेरे हटाने के लिए, पतला होने के लिए, खूबसूरत दिखने के लिए दवाइयों का सहारा लेते हैं। लेकिन यह कतई सही नहीं है। ऐसा करने से कुछ दिनों के लिए भले हम बेहतर दिखें मगर भविष्य में इसके नकारात्मक प्रभाव आसानी से देखने को मिल जाते हैं। ऐसा अकसर तब किया जाता है कि मुंह में दाने आने लगते हैं। मुंहासों या अन्य दानों के लिये विशेषज्ञ से पूछे बगैर किसी दवाई का इस्तेमाल न करें। बेहतर होगा दवाई का सहारा न लिया जाए।
फेमस होने के लिए लोग कर रहे हैं ऐसा
फेमस होने के लिए लोग कर रहे हैं ऐसा फेमस होने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते, कोई अपने काम से फेमस है तो कोई नाम से। पिछले कुछ दिनों में लोगों के फेमस होने के तरीके में काफी बदलाव आया है। या यूं कहे कि फेमस होने के लिए लोगों ने पब्लिसिटी स्टंट के तरीके थोड़े से बदल लिए है। अब लोग काम से कम और नाम से ज्यादा फेमस होना चाहते हैं। आपको यकीन नहीं होता तो खुद देखिए इन तस्वीरों को और सोचिए इनका नाम ज्यादा फेमस है या काम। एक और पब्लिसिटी का फंडा!!! सिटी के कई हिस्सों में इन दिनों ध्यान खींचने के लिए अलग-अलग तरह के बोर्ड लगाए जा रहे हैं। ऐसा ही एक नया बोर्ड भानपुरा इलाके में लगा एक दुकान पर।
सफलं होने के तरीके
सफलं होने के तरीके सफलं होने के नियम इस प्रकार हैं :- एक ऐसा हँसमुख व्यक्ति बनिए, जिसके साथ होने पर कोई तनाव में ना रहे। अपने मष्तिष्क को शांत रखने कि आदत डालिए ताकि कठिन परिस्थितियों में आप उत्तेजित या परेशान ना हो पाएं। और सही निर्णय ले सकें । नाम याद रखने कि आदत डाले । अगर आप ऐसा नहीं करते है तो सामने वाले को यह लग सकता है कि आपकी उनमे रूचि नहीं है। बड- बोल मत बोलिए। अर्थात ऐसी बड़ी बड़ी बाते मत बोलिए जिससे आप का ही रोब झलके। सामने वाले को यह एहसास न होने दें कि आप खुद को ही सर्व ज्ञानी समझते हैं और सामने वाला आप के समक्ष कुछ भी नहीं है। अपने आप को दिलचस्प बनाइये जिससे लोग आप का साथ पसंद करें। आप के आस पास रहना चाहें। आप अपने जीवन और व्यवहार से ऐसे तत्वों को निकल दीजिये जो आप के जीवन में दुःख का कारण बने या यूँ कहें कि ऐसे तत्वों को निकाल दे जो आप के व्यक्तित्व में चुभते हों । विशुद्ध भावनावों के साथ हर miss understanding को दूर करने की पूरी कोशिश करें और जल्द से जल्द शिकायतों को नाली में बहा दें। लोगों को पसंद करने की आदत डालें। और कुछ समय बाद आप सचमुच उन्हें पसंद करने लगेंगे । हमेशा लोगों कि सफलता व उनकी उपलब्धियों पर उन्हें बधाई देने का मौका मत गवाइए । औए ना ही किसी के दुःख या उनकी निराशा में अपनी संवेदना जताने का अवसर खोइए। हर पल लोगों की help करने के लिए तैयार रहिये। लोगों को आध्यात्मिक शक्ति दीजिये और वे आप को पसंद करने लगेंगे।
पहला नियम
पहला नियम विशुद्ध सामर्थ्य का पहला नियम इस तथ्य पर आधारित है कि व्यक्ति मूल रूप से विशुद्ध चेतना है, जो सभी संभावनाओं और असंख्य रचनात्मकताओं का कार्यक्षेत्र है। इस क्षेत्र तक पहुंचने का एक ही रास्ता है. प्रतिदिन मौन. ध्यान और अनिर्णय का अभ्यास करना। व्यक्ति को प्रतिदिन कुछ समय के लिए मौन.बोलने की प्रकिया से दूर. रहना चाहिए और दिन में दो बार आधे घंटे सुबह और आधे घंटे शाम अकेले बैठकर ध्यान लगाना चाहिए। इसी के साथ उसे प्रतिदिन प्रकृति के साथ सम्पर्क स्थापित करना चाहिए और हर जैविक वस्तु की बौद्धिक शक्ति का चुपचाप अवलोकन करना चाहिए। शांत बैठकर सूर्यास्त देखें. समुद्र या लहरों की आवाज सुनें तथा फूलों की सुगंध को महसूस करें । विशुद्ध सामर्थ्य को पाने की एक अन्य विधि अनिर्णय का अभ्यास करना है। सही और गलत, अच्छे और बुरे के अनुसार वस्तुओं का निरंतर मूल्यांकन है –“निर्णय’ । व्यक्ति जब लगातार मूल्यांकन, वर्गीकरण और विश्लेषण में लगा रहता है, तो उसके अन्तर्मन में द्वंद्व उत्पन्न होने लगता है जो विशुद्ध सामर्थ्य और व्यक्ति के बीच ऊर्जा के प्रवाह को रोकने का काम करता है। चूंकि अनिर्णय की स्थिति दिमाग को शांति प्रदान करती है. इसलिए व्यक्ति को अनिर्णय का अभ्यास करना चाहिए। अपने दिन की शुरुआत इस वक्तव्य से करनी चाहिए- “आज जो कुछ भी घटेगा, उसके बारे में मैं कोई निर्णय नहीं लूंगा और पूरे दिन निर्णय न लेने का ध्यान रखूंगा।”
दूसरा नियम
दूसरा नियम सफलता का दूसरा आध्यात्मिक नियम है.- देने का नियम। इसे लेन- देन का नियम भी कहा जा सकता है। पूरा गतिशील ब्रह्मांड विनियम पर ही आधारित है। लेना और देना- संसार में ऊर्जा प्रवाह के दो भिन्न- भिन्न पहलू हैं । व्यक्ति जो पाना चाहता है, उसे दूसरों को देने की तत्परता से संपूर्ण विश्व में जीवन का संचार करता रहता है। देने के नियम का अभ्यास बहुत ही आसान है। यदि व्यक्ति खुश रहना चाहता है तो दूसरों को खुश रखे और यदि प्रेम पाना चाहता है तो दूसरों के प्रति प्रेम की भावना रखे। यदि वह चाहता है कि कोई उसकी देखभाल और सराहना करे तो उसे भी दूसरों की देखभाल और सराहना करना सीखना चाहिए । यदि मनुष्य भौतिक सुख-समृद्धि हासिल करना चाहता है तो उसे दूसरों को भी भौतिक सुख- समृद्धि प्राप्त करने में मदद करनी चाहिए।
तीसरा नियम
तीसरा नियम सफलता का तीसरा आध्यात्मिक नियम, कर्म का नियम है। कर्म में क्रिया और उसका परिणाम दोनों शामिल हैं। स्वामी विवेकानन्द ने कहा है- “कर्म मानव स्वतंत्रता की शाश्वत घोषणा है.. हमारे विचार, शब्द और कर्म. वे धागे हैं, जिनसे हम अपने चारों ओर एक जाल बुन लेते हैं। .. वर्तमान में जो कुछ भी घट रहा है. वह व्यक्ति को पसंद हो या नापसंद, उसी के चयनों का परिणाम है जो उसने कभी पहले किये होते हैं। कर्म, कारण और प्रभाव के नियम पर इन बातों पर ध्यान देकर आसानी से अमल किया जा सकता है... आज से मैं हर चुनाव का साक्षी रहूंगा और इन चुनावों के प्रति पूर्णतः साक्षीत्व को अपनी चेतन जागरूकता तक ले जाऊंगा। जब भी मैं चुनाव करूंगा तो स्वयं से दो प्रश्न पूछूंगा.. जो चुनाव मैं करने जा रहा हूं. उसके नतीजे क्या होंगे और क्या यह चुनाव मेरे और इससे प्रभावित होने वाले लोगों के लिए लाभदायक और इच्छा की पूर्ति करने वाला होगा। यदि चुनाव की अनुभूति सुखद है तो मैं यथाशीघ्र वह काम करूंगा लेकिन यदि अनुभूति दुखद होगी तो मैं रुककर अंतर्मन में अपने कर्म के परिणामों पर एक नजर डालूंगा। इस प्रकार मैं अपने तथा मेरे आसपास के जो लोग हैं. उनके लिए सही निर्णय लेने में सक्षम हो सकूंगा।.
चौथा नियम
चौथा नियम सफलता का चौथा नियम “अल्प प्रयास का नियम” है। यह नियम इस तथ्य पर आधारित है कि प्रकृति प्रयत्न रहित सरलता और अत्यधिक आजादी से काम करती है। यही अल्प प्रयास यानी विरोध रहित प्रयास का नियम है। प्रकृति के काम पर ध्यान देने पर पता चलता है कि उसमें सब कुछ सहजता से गतिमान है। घास उगने की कोशिश नहीं करती, स्वयं उग आती है। मछलियां तैरने की कोशिश नहीं करतीं, खुद तैरने लगती हैं, फूल खिलने की कोशिश नहीं करते, खुद खिलने लगते हैं और पक्षी उडने की कोशिश किए बिना स्वयं ही उडते हैं। यह उनकी स्वाभाविक प्रकृति है। इसी तरह मनुष्य की प्रकृति है कि वह अपने सपनों को बिना किसी कठिन प्रयास के भौतिक रूप दे सकता है। मनुष्य के भीतर कहीं हल्का सा विचार छिपा रहता है जो बिना किसी प्रयास के मूर्त रूप ले लेता है। इसी को सामान्यतः चमत्कार कहते हैं लेकिन वास्तव में यह अल्प प्रयास का नियम है। अल्प प्रयास के नियम का जीवन में आसानी से पालन करने के लिए इन बातों पर ध्यान देना होगा..- मैं स्वीकृति का अभ्यास करूंगा। आज से मैं घटनाओं, स्थितियों, परिस्थितियों और लोगों को जैसे हैं. वैसे ही स्वीकार करूंगा, उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार ढालने की कोशिश नहीं करूंगा। मैं यह जान लूंगा कि यह क्षण जैसा है, वैसा ही होना था क्योंकि सम्पूर्ण ब्रह्मांड ऐसा ही है । मैं इस क्षण का विरोध करके पूरे ब्रह्मांड से संघर्ष नहीं करूंगा, मेरी स्वीकृति पूर्ण होगी। मैं उन स्थितियों का, जिन्हें मैं समस्या समझ रहा था, उनका उत्तरदायित्व स्वयं पर लूंगा। किसी दूसरे को अपनी स्थिति के लिए दोषी नहीं ठहराऊंगा। मैं यह समझूंगा कि प्रत्येक समस्या में सुअवसर छिपा है और यही सावधानी मुझे जीवन में स्थितियों का लाभ उठाकर भविष्य संवारने का मौका देगी।.. ..मेरी आज की जागृति आगे चलकर रक्षाहीनता में बदल जाएगी। मुझे अपने विचारों का पक्ष लेने की कोई जरूरत नहीं पडेगी। अपने विचारों को दूसरों पर थोपने की जरूरत भी महसूस नहीं होगी । मैं सभी विचारों के लिए अपने आपको स्वतंत्र रखूंगा ताकि एक विचार से बंधा नहीं रहूं। ..
पांचवा नियम
पांचवा नियम सफलता का पांचवां आध्यात्मिक नियम “उद्देश्य और इच्छा का नियम” बताया गया है। यह नियम इस तथ्य पर आधारित है कि प्रकृति में ऊर्जा और ज्ञान हर जगह विद्यमान है। सत्य तो यह है कि क्वांटम क्षेत्र में ऊर्जा और ज्ञान के अलावा और कुछ है ही नहीं। यह क्षेत्र विशुद्ध चेतना और सामर्थ्य का ही दूसरा रूप है. जो उद्देश्य और इच्छा से प्रभावित रहता है। ऋग्वेद में उल्लेख है.. प्रारंभ में सिर्फ इच्छा ही थी जो मस्तिष्क का प्रथम बीज थी। मुनियों ने अपने मन पर ध्यान केन्द्रित किया और उन्हें अर्न्तज्ञान प्राप्त हुआ कि प्रकट और अप्रकट एक ही है। उद्देश्य और इच्छा के नियम का पालन करने के लिए व्यक्ति को इन बातों पर ध्यान देना होगा.. उसे अपनी सभी इच्छाओं को त्यागकर उन्हें रचना के गर्त के हवाले करना होगा और विश्वास कायम रखना होगा कि यदि इच्छा पूरी नहीं होती है तो उसके पीछे भी कोई उचित कारण होगा । हो सकता है कि प्रकृति ने उसके लिए इससे भी अधिक कुछ सोच रखा हो। व्यक्ति को अपने प्रत्येक कर्म में वर्तमान के प्रति सतर्कता का अभ्यास करना होगा और उसे ज्यों का त्यों स्वीकार करना होगा लेकिन उसे साथ ही अपने भविष्य को उपयुक्त इच्छाओं ओर दृढ उद्देश्यों से संवारना होगा।
छठवां नियम
छठवां नियम सफलता का छठा आध्यात्मिक नियम अनासक्ति का नियम है। इस नियम के अनुसार व्यक्ति को भौतिक संसार में कुछ भी प्राप्त करने के लिए वस्तुओं के प्रति मोह त्यागना होगा। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि वह अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए अपने उद्देश्यों को ही छोड दे । उसे केवल परिणाम के प्रति मोह को त्यागना है। व्यक्ति जैसे ही परिणाम के प्रति मोह छोड देता है. उसी वह अपने एकमात्र उद्देश्य को अनासक्ति से जोड लेता है। तब वह जो कुछ भी चाहता है. उसे स्वयमेव मिल जाता है। अनासक्ति के नियम का पालन करने के लिए निम्न बातों पर ध्यान देना होगा.. आज मैं अनासक्त रहने का वायदा करता हूं। मैं स्वयं को तथा आसपास के लोगों को पूर्ण रूप से स्वतंत्र रहने की आजादी दूंगा। चीजों को कैसा होना चाहिए. इस विषय पर भी अपनी राय किसी पर थोपूंगा नहीं। मैं जबरदस्ती समस्याओं के समाधान खोजकर नयी समस्याओं को जन्म नहीं दूंगा। मैं चीजों को अनासक्त भाव से लूंगा। सब कुछ जितना अनिश्चित होगा. मैं उतना ही अधिक सुरक्षित महसूस करूंगा क्योंकि अनिश्चितता ही मेरे लिए स्वतंत्रता का मार्ग सिद्ध होगी। अनिश्चितता को समझते हुए मैं अपनी सुरक्षा की खोज करूंगा।..
सातवां नियम
सातवां नियम सफलता का सातवां आध्यात्मिक नियम. धर्म का नियम. है। संस्कृत में धर्म का शाब्दिक अर्थ..जीवन का उद्देश्य बताया गया है। धर्म या जीवन के उद्देश्य का जीवन में आसानी से पालन करने के लिए व्यक्ति को इन विचारों पर ध्यान देना होगा.. ..मैं अपनी असाधारण योग्यताओं की सूची तैयार करूंगा और फिर इस असाधारण योग्यता को व्यक्त करने के लिए किए जाने वाले उपायों की भी सूची बनाऊंगा। अपनी योग्यता को पहचानकर उसका इस्तेमाल मानव कल्याण के लिए करूंगा और समय की सीमा से परे होकर अपने जीवन के साथ दूसरों के जीवन को भी सुख.समृद्धि से भर दूंगा। हर दिन खुद से पूछूंगा..मैं दूसरों का सहायक कैसे बनूं और किस प्रकार मैं दूसरों की सहायता कर सकता हूं। इन प्रश्नों के उत्तरों की सहायता से मैं मानव मात्र की प्रेमपूर्वक सेवा करूंगा।


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