कहानी - उपमन्यु नाम का एक बालक था, उसकी उम्र थी करीब 13 साल। उपमन्यु मां के साथ अपने मामा के यहां रहता था। एक दिन मामा और उनके बच्चे दूध पी रहे थे। उपमन्यु की भी इच्छा हुई, वह भी दूध पीना चाहता था। उसने अपनी मां से ये बात कही।
मां ने बेटे से कहा, ‘हमें यहां रहने की जगह मिल गई है, ये ही काफी है।’ अचानक ही मां ने ये भी बोल दिया, ‘दूध पीना तेरे भाग्य में नहीं लिखा है।’
छोटे बच्चे ने मां से पूछा, ‘मेरे भाग्य में दूध पीना क्यों नहीं लिखा है?’
मां ने समझाने की जगह पानी में आटा घोला और उपमन्यु को पीने के लिए दे दिया। उपमन्यु बोला, ‘मां ये दूध नहीं है।’
मां बोली, ‘मैं तुझे दूध नहीं पिला सकती। तेरे भाग्य में नहीं है।’
उपमन्यु बोला, ‘आप दूध की बात तो छोड़ो, मुझे ये बताओ कि मैं अपना भाग्य कैसे बदल सकता हूं?’
मां बोली, ‘भाग्य तो शायद ही किसी का बदलता है। लेकिन, स्थितियां बदली जा सकती हैं। हालात बदलते हैं तप और परिश्रम करने से।’
बेटे ने पूछा, ‘तो मैं क्या परिश्रम करूं कि ये हालात बदल जाएं?’
मां ने कहा, ‘तू शिव की उपासना कर।’
माता की बात मानकर बालक उपमन्यु शिवजी की उपासना करने लगा। बच्चे के कठिन तप से शिव प्रसन्न हो गए। वे प्रकट हुए और उपमन्यु से वर मांगने के लिए कहा।
उपमन्यु बोला, ‘मैं योग्य बनने के लिए तप कर रहा हूं। मैं भी योग्य बनूं, ताकि मुझे भी पीने के लिए दूध मिल सके।’
शिवजी समझ गए कि बालक की क्या इच्छा है। उन्होंने तथास्तु कहा और अंतर्ध्यान हो गए। इसके बाद उपमन्यु बहुत योग्य और विद्वान हो गए।
सीख- ये कहानी हमें सीख दे रही है कि मेहनत से मुश्किल समय को बदला जा सकता है। कड़ी मेहनत भी भक्ति की तरह ही है। जो लोग सही काम करते हैं, उन्हें भगवान की विशेष कृपा जरूर मिलती है। कई लोगों के जीवन में चीजों का अभाव रहता है और ये अभाव सिर्फ परिश्रम से दूर हो सकता है। इसीलिए सही दिशा में खूब मेहनत करें, जितना आपने सोचा है, उतना जरूर मिलेगा।


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